हम निम्नलिखित उपाय करके पर्यावरण की हानि को रोक सकते हैं - (i) संपोषित विकास की धारणा को लागू करके अपनी धरोहर (संसाधनों) की हानि के बिना विकास और प्रदूषण फैलाए बिना विकास प्रक्रिया को आगे बढ़ाकर। (ii) वनीकरण द्वारा यह केवल वह रास्ता है जिस पर चलकर हम पहले वाले स्वच्छ पर्यावरण को वापिस पा सकते हैं। हमने अपने बहुमूल्य वन आच्छादित क्षेत्रों को खो दिया है। वर्तमान में भारत के भौगोलिक क्षेत्र का केवल 20.5% भाग ही वनों से ढका हुआ है जबकि यह कम-से-कम 33% होना चाहिए। (iii) नियोजित औद्योगीकरण-हम औद्योगीकरण को रोक नहीं सकते लेकिन इस तरह की योजना बना सकते हैं जिससे कि, इसके कारण पर्यावरण को हानि न पहुँच सके। (iv) कृषि योग्य भूमि को केवल कृषि के लिए ही प्रयोग करना चाहिए, नहीं तो हम खाद्य सुरक्षा को खो देंगे जिससे पर्यावरण के ऊपर फिर दबाव बढ़ेगा। (v) कृषि योग्य भूमि का उपयोग आवासीय कॉलोनी बनाने के लिए बंद होना चाहिए। (vi) जल-विद्युत संयंत्र की योजना बनाते समय सरकार को उससे जैव-विविधता की होने वाली हानि तथा उससे विस्थापितों को होने वाली हानि के विषय में गंभीरता से सोचना चाहिए। (vii) विद्युत ताप संयंत्र लगाते समय ऐसे क्षेत्रों को चुना जाना चाहिए जहाँ का उत्पादन अपेक्षाकृत बहुत कम है। (viii) औद्योगिक इकाई स्थापित करते समय इस बात पर ध्यान देने की आवश्यकता है कि इससे वनस्पति तथा जीव-जंतुओं की कम-से-कम हानि हो और अच्छी पर्यावरण परिस्थितियाँ बनी रहें।
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