महासागर में ऊर्जा निम्नलिखित रूपों में भंडारित है -
(i) ज्वारीय ऊर्जा (Tidal Energy)-घूर्णन गति कारण पृथ्वी पर चंद्रमा के गुरुत्वीय खिंचाव के कारण महासागरों में जल का स्तर चढ़ता और गिरता रहता है। इसे ज्वार-भाटा कहते हैं। ज्वार-भाटे में जल के स्तर के चढ़ने तथा गिरने से हमें ज्वारीय ऊर्जा प्राप्त होती है। ज्वारीय ऊर्जा की प्राप्ति सागर के किसी संकीर्ण क्षेत्र पर बाँध का निर्माण करके की जाती है। बाँध के द्वारा पर स्थापित टरबाइन ज्वारीय ऊर्जा को विद्युत में रूपांतरित कर देता है।
(ii) तरंग ऊर्जा (Wave Energy)- यह सागरीय लहरों से संबंधित ऊर्जा है। सागर की सतह पर चलने वाली वायु की तेज धाराओं से उत्पन्न हुई लहरें ऊपर उठती और नीचे गिरती रहती हैं। यह जल को निरंतर गतिशील रखती हैं। प्रतिदिन सागर की लहरें दो बार उठती-गिरती हैं जिससे तरंग ऊर्जा प्राप्त होती है। इनसे टरबाइन घुमा कर विद्युत उत्पन्न की जाती है।
(iii) सागरीय तापीय ऊर्जा (Ocean Thermal Energy)- समुद्रों के तल का जल सूर्य द्वारा गर्म हो जाता है जबकि उनका गहराई वाला भाग अपेक्षाकृत ठंडा रहता है। ताप में इस अंतर का उपयोग सागरीय तापीय ऊर्जा रूपांतरण विद्युत संयंत्र (Ocean Thermal Energy Conversion Plant या OTEC विद्युत संयंत्र) में ऊर्जा प्राप्त करने के लिए किया जाता है। OTEC विद्युत संयंत्र केवल तभी कार्य करते हैं जब समुद्र के तल पर जल का ताप तथा 2 km तक की गहराई पर जल के ताप में `20^(@)C` का अंतर हो। तल के तप्त जल का उपयोग अमोनिया जैसे वाष्पशील द्रवों को उबालने में किया जाता है। इस प्रकार बनी द्रवों की वाष्प जनित्र के टरबाइन को घुमाती है। समुद्रों की गहराइयों से ठंड जल के पंपों से खींचकर वाष्प को ठंडा करके फिर से द्रव में संघनित किया जाता है।