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PHYSICS
सौर ऊर्जा का स्रोत क्या है ? समझाएँ।...

सौर ऊर्जा का स्रोत क्या है ? समझाएँ।

लिखित उत्तर

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सूर्य के अंतरंग में अत्यधिक उच्च ताप होने के कारण नाभिकीय संलयन प्रक्रिया होती है जिसमें हाइड्रोजन के चार नाभिक, अर्थात चार प्रोटॉन `(""_(1)^(1)H)` एक हीलियम नाभिक `(""_(2)^(4)H)` बनने के लिए संयोग करते हैं। 1939 में लेंस बेथे ने इस प्रक्रिया की सही व्याख्या दी। संलयन अभिक्रिया में निर्मुक्त ऊर्जा सूर्य को प्रदीप्त करती है जिससे अंततः विभिन्न तरंगदैर्घ्य की विद्युत-चुंबकीय तरंग (गामा विकिरण, पराबैंगनी विकिरण, दृश्य प्रकाश और अवरक्त विकिरण) का विकिरण होता है। अवरक्त विकिरण पृथ्वी को गर्म करता है।
सूर्य के अंदर होनेवाली नाभिकीय अभिक्रियाएँ निम्नलिखित हैं, जिनमें `""_(1)^(2)H` ड्यूटीरियम का नाभिक (डयूट्रॉन) है और `""_(2)^(3)He` हीलियम के हल्के समस्थानिक का नाभिक है।
`""_(1)^(1)H + ""_(1)^(1)H to ""_(1)^(2)H + ""_(1)^(0)e`
`""_(1)^(2) + ""_(1)^(1)H to ""_(2)^(3) He + gamma`-विकिरण
`""_(2)^(3) He + ""_(2)^(3) He to ""_(2)^(4) He + ""_(1)^(1) H + ""_(1)^(1)H`
तीसरी अभिक्रिया होने के लिए पहली दो अभिक्रिया को दो बार होना चाहिये। इस अभिक्रिया (प्रोटॉन-प्रोटॉन शृंखला) के प्रथम चरण में उत्पन्न पॉजीट्रॉन `(""_(1)^(0)e)` इलेक्ट्रॉनों से टकराते हैं और उनका विनाश होता है। जिसके कारण उत्पन्न ऊर्जा का रूपांतरण गामा `(gamma)` विकिरण में होता है। अतः श्रृंखला का नेटत्र प्रभाव चार हाइड्रोजन नाभिकों का समायोजन एक हीलियम नाभिक और गामा विकिरण में होता है। निर्मुक्त ऊर्जा करीब 25.5 MeV होती है।
इस प्रकार नाभिकीय संलयन अभिक्रिया ही सौर ऊर्जा का स्रोत है।
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