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BIOLOGY
पारितंत्र में ऊर्जा प्रवाह किस प्रकार हो...

पारितंत्र में ऊर्जा प्रवाह किस प्रकार होता है?

लिखित उत्तर

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जीवमंडल में ऊर्जा का मूल स्रोत सौर ऊर्जा है। उत्पादक इसे प्रकाश संश्लेषण क्रिया. के दौरान ग्रहण करते हैं। प्रकाश संश्लेषण क्रिया द्वारा रासायनिक ऊर्जा कार्बोहाइड्रेट के रूप में मुक्त होती है। जो पौधे में अनेक रूपों में संचित रहती है। जब हरे पौधे को शाकाहारी जन्तु खाते हैं। तब यह संचित ऊर्जा स्थानांतरित होकर इन जन्तुओं यानी प्राथमिक उपभोक्ता में चली जाती है। इसके कुछ ऊर्जा ऊष्मा ऊर्जा के रूप में मुक्त हो जाती है। शेष संचित ऊर्जा उसके शरीर में संचित रहती है। जब द्वितीय उपभोक्ता उसे खाता है तो वह ऊर्जा उसमें स्थानांतरित हो जाता है। इस तरह द्वितीयक उपभोक्ता से ऊर्जा तृतीयक उपभोक्ता। इस प्रकार ऊर्जा का प्रवाह होता है।
ऊर्जा का प्रवाह सदा एक दिशा में ही होता है। आहार श्रृंखला के प्रत्येक पोषी स्तर पर कुल ऊर्जा के 10 प्रतिशत ऊर्जा का ही स्थानान्तरण अगले पोषी स्तर को हो पाता है तथा शेष 90 प्रतिशत ऊर्जा का व्यवहार विभिन्न प्रकार से हो जाता है। इस प्रकार विभिन्न पोषी स्तरों पर उपलब्ध होने वाले ऊर्जा में उत्तरोत्स्तर कमी होती जाती है।
इस प्रकार हम पाते हैं कि अधिकतम ऊर्जा उत्पादक स्तर पर संचित है तथा इस ऊर्जा में हर पोषी स्तर पर उत्तरोत्स्तर कमी आती है। इस तरह ऊर्जा का प्रवाह होता है।
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