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BIOLOGY
पीड़कनाशी अगर अपघटित न हो तो आहार श्रृंखल...

पीड़कनाशी अगर अपघटित न हो तो आहार श्रृंखला में उसका क्या प्रभाव होगा?

लिखित उत्तर

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आहार श्रृंखला का एक आयाम यह है कि हमारी जानकारी के बिना ही कुछ हानिकारक रासायनिक पदार्थ आहार श्रृंखला से होते हुए हमारे शरीर में प्रविष्ट हो जाते हैं। हम जानते हैं कि जल प्रदूषण किस प्रकार होता है। इसका एक कारण है कि विभिन्न फसलों को रोग एवं पीड़कों से बचाने के लिए पीड़कनाशक एवं रसायनों का अत्यधिक प्रयोग करना है। ये रसायन बहकर मिट्रियों में अथवा जल स्रोत में चले जाते हैं। मिट्टी से इन पदार्थों का पौधे द्वारा जल एवं खनिजों के साथ-साथ अवशोषण हो जाता है तथा जलाशयों से यह जलीय पौधों एवं जंतुओं में प्रवेश कर पाते हैं। यह केवल एक तरीका है जिससे यह आहार श्रृंखला में प्रवेश करते हैं। क्योंकि यह पदार्थ अजैव निम्नीकृत हैं, यह प्रत्येक पोषी-स्तर पर उत्तरोत्स्तर संग्रहित होते जाते हैं। क्योंकि किसी भी आहार श्रृंखला में मनुष्य शीर्षस्थ है, अतः हमारे शरीर में यह रसायन सर्वाधिक मात्रा में संचित हो जाते हैं। इसे जैव आवर्धन कहते हैं। यही कारण है कि हमारे खाद्यान्न गेहूँ तथा चावल, सब्जियाँ, फल तथा मांस में पीड़क रसायन के अवशिष्ट विभिन्न मात्रा में उपस्थित होते हैं।
वास्तव में पीड़कनाशी को अपघटन आहार श्रृंखला में नहीं होता है। ये पोषी स्तर पर उत्तरोत्स्तर जनक होते जाते हैं। जिसके कारण हमारे खाद्यान्न में ये उपस्थित रहते हैं। जिन्हें हम इसे धोकर या किसी अन्य प्रकार से अलग नहीं कर सकते हैं।
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