तंत्रिका कोशिका यह विशेष रूप से लंबी कोशिका है जो संदेशों के संवहन की मूल इकाई है।
इस कोशिका में जीवद्रव्य से घिरा एक केंद्रक होता है। जीवद्रव्य से बहुत-सी छोटी-छोटी शाखाएँ निकलती हैं, जिन्हें डेंड्राइट कहते हैं। इनमें से एक शाखा बहुत लंबी होती है जिसे एक्सॉन कहते हैं। एक्सॉन संदेशों को कोशिका से दूर ले जाता है।
एक तन्त्रिका कोशिका सीधे ही दूसरे तंत्रिका कोशिका से नहीं जुड़ी होती। इनके बीच में कुछ खाली स्थान होता है जिसमें बहुत ही समीप का संवहन होता है। इसे अंतर्ग्रथन (सिनेप्स) कहते हैं। यदि हमें हाथ में दर्द है तो यह सूचना हाथ में स्थित संवेदी तंत्रिका कोशिका के डेंड्राइट ग्रहण करते हैं। तंत्रिका कोशिका इसे विद्युत्. सिग्नल (संकेत) में बदल देती है। यह संकेत तंत्रिकाक्ष द्वारा प्रवाहित होता है तथा अंतर्गंथन में होता हुआ मस्तिष्क तक पहुँचता है। मस्तिष्क संदेश को ग्रहण करके उस पर अनुक्रिया करता है। प्रेरक तंत्रिका इस अनुक्रिया को हाथ की पेशियों तक पहुँचाती है तथा हाथ की पेशियाँ उचित अनुक्रिया करती हैं।
इस प्रकार तंत्रिका कोशिका तीन प्रकार की होती हैं-
1. संवेदी तंत्रिका कोशिका- यह शरीर के विभिन्न भागों में संवेदनाएँ मस्तिष्क की ओर ले जाती हैं।
2. प्रेरक तंत्रिका कोशिका- यह मस्तिष्क से आदेश लेकर पेशियों तक पहुँचाती है।
3. बहुघुवी तंत्रिका कोशिका- यह संवेदनाओं को मस्तिष्क की ओर तथा मस्तिष्क के आदेशों को पेशियों की ओर ले जाने के दोनों कार्य करती है।