संक्रमण से होने वाले रोग सूक्ष्मजीवों के द्वारा होते हैं, जैसे -
1. हैज़ा - हैज़ा का कारक जीव वित्रियों कोलरी है। यह दूषित जल के पीने या संक्रमित खाद्य-पदार्थों के खाने से होता है, लगातार बुखार, थूक के साथ रक्त, शरीर में दर्द, अतिसार और गर्दन की गांठों में सूजन आ जाती है।
2. टायफाइड - यह सालमोनेला बैक्टीरियम टाइफी द्वारा फैलता है। बुखार आना, सिरदर्द, नाक से रक्त का बहना, त्वचा पर चकते पड़ना, छाती पर लाल दाने टायफाइड के प्रमुख लक्षण हैं।
3. खाँसी - जुकाम-यह राइनो विषाणु द्वारा होता है। जुकाम में नाक से तरल पदार्थ का बहना, आँखों का लाल होना, जलन होना व सिरदर्द इसके प्रमुख लक्षण हैं।
4. चिकनपॉक्स - इसका कारक जीव बेरीसोला जोस्टर विषाणु है। इसमें रोगी को शरीर पर चकते, पीठ में दर्द, तेज बुखार, तथा सिरदर्द होता है। इसका प्रभाव 14 दिन तक रहता है।
5. पोलियो - यह बच्चों को होने वाला संक्रामक रोग है। यह पोलियो माइलिटिस विषाणु द्वारा फैलता है। बुखार, उल्टी, शरीर में दर्द, ऐंठन व मांसपेशियों के नियंत्रण में बाधा, इसके लक्षण हैं। बच्चों के शरीर में पक्षाघात हो जाता है।
6. रेबीज़ - यह रेबीज़ विषाणु द्वारा फैलता है। यह रोग कुत्ते, बिल्ली, चमगादड़, गीदड़, लोमड़ी आदि के काटने से होता है। रेबीज से प्रभावित व्यक्ति जल से डरता है। इससे तंत्रिका तंत्र प्रभावित होता है और इस रोग से रोगी की दर्दनाक मृत्यु हो जाती है।
7. एड्स - यह लैंगिक संचारी रोग की श्रेणी में आता है जो विषाणु के द्वारा फैलता है। HIV एड्स से प्रभावित व्यक्ति में प्रतिरक्षा-तंत्र कमज़ोर पड़ जाता है जिसके कारण शरीर हल्के से संक्रमण का मुकाबला करने में भी असमर्थ हो जाता है। HIV से प्रभावित व्यक्ति को हल्के खाँसी-जुकाम से भी निमोनिया हो जाता है। फिलहाल एड्स असाध्य रोग है।