भारत में संचरणीय रोगों की रोकथाम के लिए निम्नलिखित महत्त्वपूर्ण कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं -
1. राष्ट्रीय मलेरिया उन्मूलन कार्यक्रम - यह कार्य सन् 1953 में आरंभ किया गया। सन् 1975 में इसे नियंत्रण की बजाय पूर्ण उन्मूलन में परिवर्तित कर दिया गया। सन् 1977 में परिवर्तित कार्यक्रम प्रारंभ किया गया जिसे प्रभावी ढंग से लागू किया गया। इस कार्यक्रम में मलेरिया प्रभावित क्षेत्रों का निरीक्षण करना, उपयुक्त औषधियों के लिए लोगों को शिक्षित करना, मच्छर मारने के लिए कीटनाशक औषधियाँ छिड़कना, मलेरिया रोगी का पता लगाना, मलेरिया रोधी औषधियों का वितरण करना, उनका लेखा-जोखा रखना आदि सम्मिलित हैं।
2. राष्ट्रीय तपेदिक उन्मूलन कार्यक्रम - इस कार्य के निम्नलिखित क्रम हैं -
(1) तपेदिक से ग्रसित रोगी का प्रारंभिक अवस्था में पता लगाकर उसका उपचार करना।
(2) कम आयु में व्यक्तियों को बी०सी०जी० के टीके लगवाकर रोग से बचाना।
(3) देश में कई टी०बी० क्लीनिक, जिला केंद्र तथा प्रदर्शन केंद्र स्थापित किए गए हैं।
3. राष्ट्रीय हैज़ा उन्मूलन कार्यक्रम - इसके अंतर्गत हैज़ा प्रभावित क्षेत्रों में स्वच्छता, पीने के लिए स्वच्छ जल उपलब्ध करवाना तथा शहरी मल-मूत्र के उपयुक्त निष्कासन आते हैं। इसके लिए स्वास्थ्य शिक्षा तथा तत्काल चिकित्सा के लिए भ्रमणशील (मोबाइल) चिकित्सा इकाइयाँ स्थापित की गई हैं। इसमें हैजे के टीके लगवाने का प्रबंध किया गया है।
4. राष्ट्रीय कुष्ठ रोग उन्मूलन कार्यक्रम - भारत में इस रोग का सर्वे किया गया तथा उपचार के लिए कई केंद्र खोले गए हैं। रोगियों के पुनर्वास के लिए मकान बनाए गए हैं। मद्रास (चेन्नई) सरकार ने कुष्ठ रोग शिक्षण तथा अनुसंधान केंद्र खोला है, जहाँ पर इस रोग की सलाहकार समिति है। इसमें सल्फोन औषधि द्वारा उपचार किया जाता है।