जल, पर्यावरण में लगातार परिवहित होता रहता है। इसको जलीय चक्र (Hydrological Cycle) कहते हैं।
जल में मुख्य तत्त्व हाइड्रोजन है जिसका चक्रण पानी के यौगिक के रूप में प्रवाहित होने के साथ होता है। जलाशयों (सागर, समुद्र, झील, नदियाँ) तथा जैव जीवों के शरीर की सतह से जल का लगातार वाष्पन होता रहता है तथा वायु में मिलता रहता है। इसके अतिरिक्त पौधों द्वारा भूमि में से अवशोषित जल भी वाष्पोत्सर्जन द्वारा (पत्तों के रंधों से) वायु में मिलता रहता है। जंतुओं द्वारा भोजन के साथ ग्रहण किया गया जल भी श्वसन क्रिया द्वारा वाष्पों के रूप में वायुमंडल में मिलता रहता है। इस प्रकार विभिन्न स्रोतों से जल वाष्पों के रूप में वायुमंडल में मिलता रहता है। वायुमंडल में उपस्थित जलवाष्प न्यून ताप पर संघनित होकर जल की बूंदें बनाते हैं। ये बूंदें वर्षा अथवा हिम के रूप में बरसती हैं और इस प्रकार जल पुनः पृथ्वी (मृदा एवं जलाशय) पर वापिस आ जाता है। इस प्रकार जीवमंडल में जल-चक्र चलता रहता है।