प्रोटीन नाइट्रोजन के यौगिक हैं। ये पौधे तथा प्राणियों के शरीर का एक मुख्य अंग हैं। प्रोटीन की कमी से पौधों तथा जंतुओं की वृद्धि रुक जाती है, क्योंकि प्रोटीन से ही जीवों में वृद्धि होती है। जंतु पौधों से भोजन प्राप्त करते हैं। इसमें प्रोटीन भी होती है। जब पौधे तथा जंतु मरकर गलते-सड़ते हैं तो विशेष प्रकार के अपघटक जीवाणु व कवक (Saprophytic Bacteria) इन्हें अमोनिया के लवणों में बदल देते हैं।
इन लवणों को नाइट्रेट बनाने वाले जीवाणु (Nitrifying Bacteria) नाइट्रेट में बदल देते हैं। इन नाइट्रेटों का कुछ भाग तो पौधों की जड़ों के रोम ग्रहण करके उन्हें प्रोटीन में बदल देते हैं। शेष नाइट्रेट विनाइट्रीकारक जीवाणुओं द्वारा नाइट्रोजन में बदल जाते हैं। इस प्रकार नाइट्रोजन पुनः वायुमंडल में आ जाती है। वायुमंडलीय नाइट्रोजन को स्थिर करने वाले जीवाणु मिट्टी तथा अन्य फलीदार पौधों (लैग्यूम) की जड़ों में पाई जाने वाली मूल-ग्रंथियों में पाए जाते हैं। ये जीवाणु स्वतंत्र नाइट्रोजन को इसके यौगिकों में बदल देते हैं, जिन्हें पौधे ग्रहण कर लेते हैं। वायुमंडलीय नाइट्रोजन का कुछ भाग आकाशीय बिजली द्वारा भूमि में स्थिर होता रहता है। फैक्ट्रियों में बनाए जाने वाले उर्वरक भी नाइट्रोजन का स्थिर रूप हैं। यह नाइट्रोजन पौधों द्वारा अवशोषित होकर नाइट्रोजन खाध जाल में से गुजरती है। इस प्रकार प्रकृति में यह नाइट्रोजन चक्र लगातार चलता रहता है।
