स्थितिज ऊर्जा-किसी वस्तु में उसकी स्थिति अथवा आकार में परिवर्तन के कारण जो ऊर्जा उत्पन्न होती है उसे स्थितिज ऊर्जा कहते हैं। व्यंजक-माना m द्रव्यमान की कोई वस्तु पृथ्वी की सतह पर A बिंदु पर रखी है। उसे F बल लगाकर B बिंदु तक उठाया गया। A व B के मध्य दूरी h है। जैसा कि हम जानते हैं कि वस्तु को उठाने में लगने वाला बल वस्तु पर लगे गुरुत्वाकर्षण बल के बराबर व विपरीत होता है `F=(GM_e m)/(R_(e)^(2))` जहाँ `M_e`= पृथ्वी का द्रव्यमान `R_e `= पृथ्वी की त्रिज्या लेकिन `g = (GM_e)/(R_(e)^2)` (g = गुरुत्वीय त्वरण)...........(ii) समीकरण (i) व (ii) से `F = mg` वस्तु को h ऊँचाई तक ले जाने में किया गया कार्य `W = F xx s ( :. s = h) ` = mgh क्योंकि किया गया कार्य और ऊर्जा समान ही है। अतः h ऊँचाई पर वस्तु की स्थितिज ऊर्जा (P.E.) = mgh
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