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CHEMISTRY
वैद्युत संयोजक यौगिकों की प्रमुख विशेषता...

वैद्युत संयोजक यौगिकों की प्रमुख विशेषताओं का उल्लेख करें।

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वैद्युत संयोजक या आयनिक यौगिकों की प्रमुख विशेषतायें इस प्रकार हैं-
(i) ये यौगिक धन और ऋण आवेशयुक्त आयनों के बने होते हैं। उदाहरण के लिये, सोडियम (i) ये यौगिक धन और ऋण आवेशयुक्त आयनों के बने होते हैं। उदाहरण के लिये, सोडियम क्लोराइड `(NaCl)Na^+" और "Cl^(-)` आयनों का बना होता है। ये आयन त्रिआयामी रूप से एक निश्चित क्रम में व्यवस्थित होकर रवा (क्रिस्टल) बनाते हैं।
(ii) इनके द्रवणांक और क्वथनांक उच्च होते हैं। इसका कारण यह है कि धन आयनों एवं ऋण आयनों के बीच मजबूत स्थिर वैद्युत आकर्षण बल कार्य करता है। इस आकर्षण बल को तोड़ने के लिये पर्याप्त ऊष्मा ऊर्जा की आवश्यकता होती है। अतः वैद्युत संयोजक यौगिकों के द्रवणांक और क्वथनांक उच्च होते हैं। इसे एक प्रयोग द्वारा समझा जा सकता है- प्रयोग एक स्पैचुला (Spatula) में थोड़ा सोडियम क्लोराइड लें। यह एक सफेद ठोस पदार्थ है। इसे ज्वालक की सहायता से गर्म करें। आप देखेंगे कि सोडियम क्लोराइड नहीं पिघलता है। इससे स्पष्ट होता है कि इसका द्रवणांक काफी उच्च होने के कारण यह आसानी से नहीं पिघलता है।

(iii) ये जल में प्रायः विलेय किन्तु बेंजीन, ऐसीटोन, कार्बन डाइसल्फाइड और कार्बन टेट्राक्लोराइड जैसे कार्बनिक विलायकों में अविलेय होते हैं। इसका कारण यह है कि जल के अणु आयनिक यौगिक में विद्यमान आयनों के साथ पारस्परिक क्रिया करते हैं जिससे आयनों के बीच का आकर्षण बल कमजोर होकर टूट जाता है और आयन अलग-अलग हो जाते हैं। परन्तु कार्बनिक विलायकों के साथ ऐसी कोई बात नहीं होती है।
(iv) ये द्रवित या जलीय विलयन की अवस्था में विद्युत के सुचालक होते हैं। ठोस अवस्था में यौगिकों के आयन निश्चित स्थानों पर बंधे रहते हैं और ये एक स्थान से दूसरे स्थान में गमन नहीं कर सकते हैं। अत: ठोस की अवस्था में ये यौगिक विद्युत का चालक नहीं होते हैं। परन्तु पिघली हुयी अवस्था में या इनके जलीय विलयन में इनके आयन मुक्त रूप से एक स्थान से दूसरे स्थान में गमन कर सकते हैं। अर्थात् इन अवस्थाओं में ये विद्युत के सुचालक हो जाते हैं। इसे निम्नलिखित प्रयोग द्वारा आसानी से समझा जा सकता है-
प्रयोग एक छन्ना-पत्र (Filter Paper) लेकर उसे पोटैशियम नाइट्रेट `(KNO_3)` के जलीय विलयन में भिंगोकर ग्रेफाइट की दो छड़ों पर लपेट देते हैं, जैसा कि चित्र में दिखाया गया है। छन्ना-पत्र के मध्य में कॉपर क्रोमेट `(CuCrO_4)` के विलयन की एक बूंद टपका देते हैं। अब ग्रेफाइट की छड़ों में एक बैटरी की सहायता से विद्युत प्रवाहित करते हैं। आप देखेंगे कि नीले रंग के क्यूप्रिक आयन (Cult) बैटरी के ऋण ध्रुव की ओर गमन कर रहे हैं जबकि पीले रंग के क्रोमेट आयन `(CrO_4^(2-))` बैटरी के धन ध्रुव की ओर गमन कर रहे हैं।

अतः इस प्रकार निष्कर्ष के रूप में कहा जा सकता है कि वैद्युत संयोजक या आयनिक यौगिकों की कई विशेषतायें हैं।
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