मेंडलीव की आवर्त सारणी में निम्नलिखित दोष हैं
1. हाइड्रोजन का स्थान-आवर्त सारणी में हाइड्रोजन का स्थान अनिर्णित है। हाइड्रोजन के कुछ गुण क्षार-धातुओं के सदृश होने के कारण इसे वर्ग IA में क्षार-धातुओं (Li, Na, K आदि) के साथ रखा गया है। किन्तु इसके कुछ गुण हैलोजन तत्वों से भी समानता रखते हैं, अतः इसे वर्ग VIIA में हैलोजन तत्वों (E, CI, Br आदि) के साथ भी रखा जा सकता है।
क्षार-धातुओं एवं हाइड्रोजन के गुणों में समानता
हैलोजन और हाइड्रोजन के गुणों में समानता :
2. दुष्प्राप्य मृदा तत्वों का स्थान दुष्प्राप्य मृदा तत्वों की दो श्रेणियाँ हैं जो लैंथेनाइड्स (Lanthanides) और ऐक्टिनाइड्स (actinides) कहलाती हैं। (परमाणु संख्या 57 से लेकर 71 तकवाले तत्व लैंथेनाइड्स एवं परमाणु संख्या 90 से लेकर 103 तक वाले तत्व ऐक्टिनाइड्स कहलाते हैं।) लैंथेनाइड्स आवर्त सारणी के वर्ग III B के अंतर्गत आवर्त 6 के सदस्य हैं। यदि इन्हें इनके बढ़ते हुए परमाणु द्रव्यमानों के क्रम में रखा जाए तो यह असंगत प्रतीत होता है और संपूर्ण आवर्त सारणी की उपयोगिता समाप्त हो जाती है। इसीलिए इन्हें आवर्त सारणी के नीचे एक अलग कतार में रखा गया है। इसी प्रकार, ऐक्टिनाइड्स को भी, जो आवर्त सारणी के वर्ग III B और आवर्त 7 के सदस्य हैं, आवर्त सारणी के नीचे एक अलग कतार में रखा गया है।
3. तत्त्वों का असंगत युग्म मेंडलीव की आवर्त सारणी में तत्त्वों को उनके बढ़ते हुए परमाणु द्रव्यमानों के क्रम में सजाया गया है। किन्तु कुछ तत्त्वों के लिए इस पद्धति का पालन नहीं किया गया है। () ऑर्गन (Ar) का परमाणु द्रव्यमान 40 और पोटैशियम (K) का परमाणु द्रव्यमान 39 होता है। किन्तु आवर्त सारणी में आर्गन (वर्ग 0) को पोटैशियम (वर्ग I) के पहले स्थान दिया गया है। (ii) कोबाल्ट (Co) और निकेल (Ni) के स्थान भी उचित क्रम में नहीं है। कोबाल्ट (परमाणु द्रव्यमान = 58.9) को निकेल (परमाणु द्रव्यमान =58.6) के पहले रखा गया है। (iii) टैल्यूरियम (परमाणु द्रव्यमान = 127.6) को आयोडीन (परमाणु द्रव्यमान = 126.9) के पहले रखा गया है। (iv) थोरियम (परमाणु द्रव्यमान = 232.12) को प्रोटऐक्टिनियम (परमाणु द्रव्यमान = 231) के पहले स्थान दिया गया है।

4.कुछ समान तत्त्वों को अलग-अलग एवं कुछ असमान तत्त्वों को एक-साथ रखा जाना-आवर्त सारणी में समान गुणवाले कुछ तत्त्वों को अलग-अलग रखा गया है। उदाहरण के लिए, कॉपर (Cu) एवं मरकरी (Hg) लगभग समान गुणवाले तत्त्व हैं, लेकिन आवर्त सारणी में ये दोनों अलग-अलग वर्गों में रख दिए गए हैं। सिल्वर (Ag) और थैलियम (Ti) भी समान गुणवाले तत्त्व हैं, किन्तु इन दोनों को आवर्त सारणी में अलग-अलग वर्गों में स्थान दिया गया है। यही स्थिति बेरियम (Ba) और लेड (Pb) के साथ भी है।
इसके विपरीत, असमान गुणवाले कुछ तत्वों को आवर्त सारणी के एक ही वर्ग में स्थान दे दिया गया है।
उदाहरण के लिए, कॉपर (Cu), सिल्वर (Ag) और गोल्ड (Au)। इनके गुण क्षार-धातुओं के साथ ही वर्ग I में रखा गया है। इसी प्रकार, मैंगनीज (Mn) को भी वर्ग VII के अंतर्गत हैलोजन तत्त्वों के साथ रखा गया है।
5. समस्थानिकों का स्थान_आवर्त सारणी में समस्थानिकों (isotopes) के लिए कोई स्थान निश्चित नहीं है।
6. आठवें वर्ग में तीन-तीन तत्त्वों को एक साथ रखा जाना—आठवें वर्ग में तीन-तीन तत्त्वों को एक ही स्थान में रखा गया है, यथा
इससे सारणी में अनियमितता आ जाती है।
मेंडलीव की आवर्त सारणी की उपर्युक्त त्रुटियों को ध्यान में रखकर इस क्षेत्र में कार्यरत वैज्ञानिक इस निष्कर्ष पर पहुँचे कि तत्त्वों के वर्गीकरण का आधार परमाणु द्रव्यमान नहीं हो सकता है। तत्त्वों में अवश्य कोई ऐसा गुण है जो तत्त्वों के वर्गीकरण का आधार बन सकता है।