सबसे पहले गैलीलियो ने यह बताया कि यदि किसी वस्तु पर कोई बल न लगाया जाए तो वह वस्तु अचर चाल से चलती रहेगी। सर्वप्रथम उसने आनत तल पर वस्तुओं की गति का अध्ययन किया। उसने पाया कि जब कोई वस्तु आनत तल पर नीचे की ओर आती है तो उसकी चाल बढ़ जाती है तथा जब वस्तु आनत तल पर ऊपर की ओर जाती है तो उसकी चाल घट जाती है जैसा कि चित्र में दिखाया गया है।
अत: उसने यह निष्कर्ष निकाला कि यदि वस्तु समतल सतह पर चले तो वस्तु की चाल बढ़ेगी और न घटेगी उसकी चाल अचर रहेगी। अब उसने कल्पना की कि यदि एक गेंद को खोखले अर्द्ध गोलाकार सतह को छते हुए नीचे जाने दिया जाए तो वह उसी ऊँचाई तक पहुँच जाएगी जिससे उसे गिराया गया था। दोलित लोलक की गति के आधार पर उसने निष्कर्ष निकाला कि लोलक का गोलक सदैव उसी ऊंचाई तक पहुँचता है जितनी ऊँचाई से वह चला था। अर्द्ध गोलाकार सतह वही कार्य करती है जो लोलक में धागे का होता है। इसके पश्चात उसने बताया कि यदि बर्तन की आकृति चित्र की तरह लें तो इस स्थिति में भी वस्तु या गेंद उसी ऊँचाई तक पहुँच जाती है यद्यपि ऐसा करने में उसे अधिक दूरी तय करनी पड़ेगी। .अब यदि बर्तन के दूसरी ओर ढलान जितना कम कर देते हैं गेंद को उसी ऊँचाई तक पहुँचने में उतनी ही अधिक दूरी तय करनी पड़ती है जैसा चित्र में दिखाया गया है। इस प्रकार वह इस निष्कर्ष पर पहुँचा कि यदि बर्तन के एक तरफ ढलान कम करते जाएँगे तो वस्तु उतनी ही अधिक दूरी तय करती जाएगी और इस प्रकार यदि ढलान बिल्कुल न रहे तथा सतह समतल हो जाए तो वस्तु अनंत दूरी तय करेगी तथा अचर वेग से चलती रहेगी।