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Class 9
PHYSICS
सरल दोलक दोलन क्यों करता है?...

सरल दोलक दोलन क्यों करता है?

लिखित उत्तर

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स्थिति 1 .माना कि सरल दोलक का लोलक विरामावस्था में है। इस स्थिति में लोलक A पर दो बल कार्य करते हैं
(a) पृथ्वी का गुरुत्व बल (गुरुत्वाकर्षण बल) ठीक नीचे की ओर।
(b) डोरी का खिंचाव (तनाव) ठीक ऊपर की ओर। गुरुत्वाकर्ष बल को डोरी का खिंचाव संतुलित किए हुए हैं। अत: लोलक (bob) विरामावस्था में है।

स्थिति 2.लोलक को महत्तम विस्थापन की स्थिति B पर ले जाकर छोड़ देते हैं। यहाँ भी लोलक पर दो बल कार्य करते हैं (a) भार (ठीक नीचे की ओर) (b) डोरी का खिंचाव (ठीक ऊपर की ओर)।
डोरी का खिंचाव बल गुरुत्व बल को संतुलित नहीं कर पाता है। अतः, वह नीचे गिरता है। लेकिन, धागा उसे एक सीमा तक ही गिरने देती है और गिरने का पथ वृत्त का चाप होता है।
स्थिति 3. A पर आते-जाते गुरुत्व बल डोरी के खिंचाव को संतुलित कर लेता है लेकिन तब तक उसमें चाल आ गया रहता है। इससे उसमें गति-जड़त्व आ जाता है। इस गति-जड़त्व के कारण लोलक बाईं ओर C की ओर चलता है। A से आगे बढ़ते ही उसकी चाल घटने लगती है।
स्थिति 4. C तक आते-आते उसकी चाल शून्य हो जाती है और वह पुन: C से नीचे A की ओर गिरता है। A से हटते ही हर समय लोलक पर प्रत्यानयन बल कार्य करता है। पर घर्षण बल तथा निलम्बन बिन्दु का घर्षण बल इस गति का विरोध करता है। फलतः कुछ समय के बाद आयाम घटते-घटते शून्य हो जाता है।
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