भाषायी कौशलों यथा - सुनना, बोलना, पढ़ना, एवं लिखना का विकास कक्षा तक पूर्ण हो जाना चाहिए ?
भाषायी कौशलों यथा - सुनना, बोलना, पढ़ना, एवं लिखना का विकास कक्षा तक पूर्ण हो जाना चाहिए ?
A
कक्षा दो
B
कक्षा तीन
C
कक्षा पांच
D
कक्षा आठ
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C
कक्षा पांच तक बच्चो के प्रमुख भाषायी कौशल यथा - सुनना, बोलना, लिखना व पढ़ना पूर्ण हो जाने चाहिए।
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भाषाई कौशलों यथा-सुनना, बोलना, पढ़ना एवं लिखना का विकास किस कक्षा तक पूर्ण हो जाना चाहिए?
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निम्नलिखित गद्यांश के आधार पर प्रश्नों के सही विकल्प चुनिये मनु बहन ने पूरे दिन की डायरी लिखी, लेकिन एक जगह लिख दिया, 'सफाई वगैरह की। गांधीजी प्रतिदिन डायरी पढ़कर उस पर अपने हस्ताक्षर करते थे। आज की डायरी पर हस्ताक्षर करते हुए गांधीजी ने लिखा,कातने की गति का हिसाब लिखा जाए। मन में आए हुए विचार लिखे जाएं। जो-जो पढ़ा हो, उसकीटिप्पणी लिखी जाए। जिसने जो पढ़ा हो, वह लिखा जाए। ऐसा करने से पढ़ा हुआ कितना पच गया है, यह मालूम हो जाएगा, जो'वगैरह' का उपयोग नहीं होना चाहिए। डायरी में 'वगैरह' शब्द के लिए कोई स्थान नहीं है" जिसने जो पढ़ा हो, वह लिखा जाए। ऐसा करने से पढ़ा हुआ कितना पच गया है, यह मालूम हो जाएगा, जो बातें हुई हों वे लिखी जाए। मनु ने अपनी गलती का अहसास किया और डायरी विधा की पवित्रता को समझा। गांधीजी ने पुनः मनु से कहा-"डायरी लिखना आसान कार्य नहीं है। यह इबादत करने जैसी विधा है। हमें शुद्ध व सच्चे रूप से प्रत्येक छोटी-बड़ी घटना को निष्पक्ष रूप से लिखना चाहिए चाहे कोई बात हमारे विरुद्ध ही क्यों न जा रही हो। इससे हममेंसच्चाई स्वीकार करने की शक्ति प्राप्त होगी। डायरी लिखना इसलिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि
निम्नलिखित गद्यांश के आधार पर प्रश्नों के सही विकल्प चुनिये मनु बहन ने पूरे दिन की डायरी लिखी, लेकिन एक जगह लिख दिया, 'सफाई वगैरह की। गांधीजी प्रतिदिन डायरी पढ़कर उस पर अपने हस्ताक्षर करते थे। आज की डायरी पर हस्ताक्षर करते हुए गांधीजी ने लिखा,कातने की गति का हिसाब लिखा जाए। मन में आए हुए विचार लिखे जाएं। जो-जो पढ़ा हो, उसकीटिप्पणी लिखी जाए। जिसने जो पढ़ा हो, वह लिखा जाए। ऐसा करने से पढ़ा हुआ कितना पच गया है, यह मालूम हो जाएगा, जो'वगैरह' का उपयोग नहीं होना चाहिए। डायरी में 'वगैरह' शब्द के लिए कोई स्थान नहीं है" जिसने जो पढ़ा हो, वह लिखा जाए। ऐसा करने से पढ़ा हुआ कितना पच गया है, यह मालूम हो जाएगा, जो बातें हुई हों वे लिखी जाए। मनु ने अपनी गलती का अहसास किया और डायरी विधा की पवित्रता को समझा। गांधीजी ने पुनः मनु से कहा-"डायरी लिखना आसान कार्य नहीं है। यह इबादत करने जैसी विधा है। हमें शुद्ध व सच्चे रूप से प्रत्येक छोटी-बड़ी घटना को निष्पक्ष रूप से लिखना चाहिए चाहे कोई बात हमारे विरुद्ध ही क्यों न जा रही हो। इससे हममेंसच्चाई स्वीकार करने की शक्ति प्राप्त होगी। मनु को अपनी किस गलती का अहसास हुआ?
निम्नलिखित गद्यांश के आधार पर प्रश्नों के सही विकल्प चुनिये मनु बहन ने पूरे दिन की डायरी लिखी, लेकिन एक जगह लिख दिया, 'सफाई वगैरह की। गांधीजी प्रतिदिन डायरी पढ़कर उस पर अपने हस्ताक्षर करते थे। आज की डायरी पर हस्ताक्षर करते हुए गांधीजी ने लिखा,कातने की गति का हिसाब लिखा जाए। मन में आए हुए विचार लिखे जाएं। जो-जो पढ़ा हो, उसकीटिप्पणी लिखी जाए। जिसने जो पढ़ा हो, वह लिखा जाए। ऐसा करने से पढ़ा हुआ कितना पच गया है, यह मालूम हो जाएगा, जो'वगैरह' का उपयोग नहीं होना चाहिए। डायरी में 'वगैरह' शब्द के लिए कोई स्थान नहीं है" जिसने जो पढ़ा हो, वह लिखा जाए। ऐसा करने से पढ़ा हुआ कितना पच गया है, यह मालूम हो जाएगा, जो बातें हुई हों वे लिखी जाए। मनु ने अपनी गलती का अहसास किया और डायरी विधा की पवित्रता को समझा। गांधीजी ने पुनः मनु से कहा-"डायरी लिखना आसान कार्य नहीं है। यह इबादत करने जैसी विधा है। हमें शुद्ध व सच्चे रूप से प्रत्येक छोटी-बड़ी घटना को निष्पक्ष रूप से लिखना चाहिए चाहे कोई बात हमारे विरुद्ध ही क्यों न जा रही हो। इससे हममेंसच्चाई स्वीकार करने की शक्ति प्राप्त होगी। गांधीजी ने 'वगैरह' शब्द पर अपनी आपत्ति क्यों जताई?
निम्नलिखित गद्यांश के आधार पर प्रश्नों के सही विकल्प चुनिये मनु बहन ने पूरे दिन की डायरी लिखी, लेकिन एक जगह लिख दिया, 'सफाई वगैरह की। गांधीजी प्रतिदिन डायरी पढ़कर उस पर अपने हस्ताक्षर करते थे। आज की डायरी पर हस्ताक्षर करते हुए गांधीजी ने लिखा,कातने की गति का हिसाब लिखा जाए। मन में आए हुए विचार लिखे जाएं। जो-जो पढ़ा हो, उसकीटिप्पणी लिखी जाए। जिसने जो पढ़ा हो, वह लिखा जाए। ऐसा करने से पढ़ा हुआ कितना पच गया है, यह मालूम हो जाएगा, जो'वगैरह' का उपयोग नहीं होना चाहिए। डायरी में 'वगैरह' शब्द के लिए कोई स्थान नहीं है" जिसने जो पढ़ा हो, वह लिखा जाए। ऐसा करने से पढ़ा हुआ कितना पच गया है, यह मालूम हो जाएगा, जो बातें हुई हों वे लिखी जाए। मनु ने अपनी गलती का अहसास किया और डायरी विधा की पवित्रता को समझा। गांधीजी ने पुनः मनु से कहा-"डायरी लिखना आसान कार्य नहीं है। यह इबादत करने जैसी विधा है। हमें शुद्ध व सच्चे रूप से प्रत्येक छोटी-बड़ी घटना को निष्पक्ष रूप से लिखना चाहिए चाहे कोई बात हमारे विरुद्ध ही क्यों न जा रही हो। इससे हममेंसच्चाई स्वीकार करने की शक्ति प्राप्त होगी। दोनों कार्य हमारे कर्तव्यों में शामिल हैं
निम्नलिखित गद्यांश के आधार पर प्रश्नों के सही विकल्प चुनिये मनु बहन ने पूरे दिन की डायरी लिखी, लेकिन एक जगह लिख दिया, 'सफाई वगैरह की। गांधीजी प्रतिदिन डायरी पढ़कर उस पर अपने हस्ताक्षर करते थे। आज की डायरी पर हस्ताक्षर करते हुए गांधीजी ने लिखा,कातने की गति का हिसाब लिखा जाए। मन में आए हुए विचार लिखे जाएं। जो-जो पढ़ा हो, उसकीटिप्पणी लिखी जाए। जिसने जो पढ़ा हो, वह लिखा जाए। ऐसा करने से पढ़ा हुआ कितना पच गया है, यह मालूम हो जाएगा, जो'वगैरह' का उपयोग नहीं होना चाहिए। डायरी में 'वगैरह' शब्द के लिए कोई स्थान नहीं है" जिसने जो पढ़ा हो, वह लिखा जाए। ऐसा करने से पढ़ा हुआ कितना पच गया है, यह मालूम हो जाएगा, जो बातें हुई हों वे लिखी जाए। मनु ने अपनी गलती का अहसास किया और डायरी विधा की पवित्रता को समझा। गांधीजी ने पुनः मनु से कहा-"डायरी लिखना आसान कार्य नहीं है। यह इबादत करने जैसी विधा है। हमें शुद्ध व सच्चे रूप से प्रत्येक छोटी-बड़ी घटना को निष्पक्ष रूप से लिखना चाहिए चाहे कोई बात हमारे विरुद्ध ही क्यों न जा रही हो। इससे हममेंसच्चाई स्वीकार करने की शक्ति प्राप्त होगी। गांधीजी प्रतिदिन डायरी पढ़कर क्या करते थे?
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