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पाठ्यक्रम को कक्षाक्रम से बहुत कड़ाई के ...

पाठ्यक्रम को कक्षाक्रम से बहुत कड़ाई के साथ बाँध देने के परिणामस्वरूप बच्चे का विकास एक अनवरत प्रक्रिया नहीं बन पाती, अपितु कृत्रिम खण्डों में बँट जाती है। एक स्थिर पाठ्यक्रम बच्चे की व्यक्तिगत रुचियों और क्षमताओं के विकास में सहयोग न देकर एक मजबूरी बन जाता है, जिसे बच्चा और उसका अध्यापक दोनों बेबस होकर स्वीकार करते हैं। यदि एक बच्चा किसी विषय में अपने . सहपाठियों से अधिक रूचि रखता है, तो पाठ्यक्रम की बदौलत उसे पूरे एक वर्ष या इससे भी अधिक प्रतीक्षा करनी होती है, तब वह उस विषय में कुछ अधिक विस्तृत जानकारी अध्यापक और नई पुस्तक से प्राप्त कर सकेगा।
  श्री अरविन्द आश्रम के शिक्षा केन्द्र में, जहाँ पाठ्यक्रम पूर्व-निर्धारित और स्थिर नहीं रहता, वह बच्चों को अपनी व्यक्तिगत रुचि और . सामर्थ्य के अनुसार किसी विषय की जानकारी की प्रगति जारी रखने में छूट रहती है। सामान्य स्कूलों में, जहाँ यह छूट नहीं दी जाती। प्राय: यह होता है कि नई कक्षा में आने पर उसे वही विषय बिल्कुल नया और अपरिचित लगता है, जिसके बारे में काफी कुछ वह पिछली कक्षा में जान चुका था। विशेष तौर पर ऐसा तब होता है, जब पाठ्यक्रम पाठ्यपुस्तकों का पर्याय हो, जैसा भारत में है।
पाठ्यक्रम को पाठ्य-पुस्तकों का पर्याय .....

A

होना चाहिए।

B

नहीं होना चाहिए।

C

कहा जा सकता है।

D

माना जाता है।

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The correct Answer is:
B

पाठ्यक्रम को पाठ्य-पुस्तकों का पर्याय नहीं होना चाहिए, क्योंकि ऐसा होने पर विद्यार्थियों के ज्ञान का क्षेत्र विस्तृत नहीं हो पाता है। अतः विकल्प (2) सही है।
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