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स्प्ष्टता, आत्मविश्वास, विषय की अच्छी पक...

स्प्ष्टता, आत्मविश्वास, विषय की अच्छी पकड़ और प्रभावशाली भाषा में अपने विचारो और भावनाओ को व्यक्त करना ही सम्प्रेषण -कला है, जो निरंतर आभास से निखारी जा सकती है। इक दिन में कोई-अच्छा वक्त नहीं बन सकता तथा भाषा पर अनायास ही किसी की पकड़ नहीं हो पाती। इसी अभ्यास से स्वामी विवेकानंद ने जिस सम्प्रेषण-कला का विकास किया था , उसने विश्व्धर्म-सम्मेलन में लाखो अमेरिका-निवासियों को चकित और मोहित कर दिया था।
सम्प्रेषण-कला क्या नहीं है ?

A

प्रभावशाली भाषा

B

अलंकरण

C

आत्मविश्वास

D

विचारो और भावनाओ को व्यक्त करना

Text Solution

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The correct Answer is:
B

गंधश में स्पष्ट रूप में कहा गया है कि स्पष्टता, आत्मविश्वास, विषय की अच्छी पकड़ और प्रभावशाली भाषा में अपने विचारो और भावनाओ को व्यक्त करना ही सम्प्रेषण कला है। अंत: अलंकार सम्प्रेषण कला नहीं है।
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