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निम्नलिखित गद्यांश को पढ़कर प्रश्नों के ...

निम्नलिखित गद्यांश को पढ़कर प्रश्नों के उत्तर दीजिए। कबीर ने समाज में रहकर समाज का समीप से निरीक्षण किया। समाज में फैले बाह्याडम्बर, भेदभाव, साम्प्रदायिकता आदि का उन्होंने पुष्ट प्रमाण लेकर ऐसा दृढ़ विरोध किया कि किसी की हिम्मत नहीं हुई जो उनके अकाट्य तकों को काट सके। कबीर का व्यक्तित्व इतना ऊँचा था कि उनके सामने टिक सकने की हिम्मत किसी में नहीं थी। इस प्रकार उन्होंने समाज तथा धर्म की बुराइयों को निकाल-निकालकर सबके सामने रखा, ऊँचा नाम रखकर संसार को ठगनेवालों के नकली चेहरों को सबको दिखाया और दीन-दलितों को ऊपर उठने का उपदेश देकर, अपने व्यक्तित्व को सुधारकर सबके सामने एक महान आदर्श प्रस्तुत कर सिद्धान्तों का निरूपण किया। कर्म, सेवा, अंहिसा तथा निगुण मार्ग का प्रसार किया। कर्मकाण्ड व मूर्तिपूजा का विरोध किया। अपनी साखियों, . रमैनियों तथा शब्दों को बोलचाल की भाषा में रखकर सबके सामने एक विशाल ज्ञानमार्ग खोला। इस प्रकार कबीर ने समन्वयवादी दृष्टिकोण अपनाया और कथनी-करनी एकता पर बल दिया। वे महान् युगद्रष्टा, समाज सुधारक तथा महान् कवि थे। उन्होंने हिन्दू-मुस्लिम के बीच समन्वय की धारा प्रवाहित कर दोनों को ही शीतलता प्रदान की।
कबीर ने किस प्रकार निर्गुण मार्ग का प्रसार किया?

A

प्राचीन सन्त-परम्परा का विरोध कर

B

व्यक्ति पूजा का खण्डन करके

C

कर्मकाण्ड और मूर्तिपूजा के विरोध द्वारा

D

शास्त्रार्थ द्वारा

Text Solution

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The correct Answer is:
C

गद्यांश में स्पष्ट रूप से बताया गया है कि कबीर ने कर्मकाण्ड और मूर्तिपूजा के विरोध द्वारा निर्गुण मार्ग का प्रसार किया।
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