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Class 12
PHYSICS
एक गाइगर-मार्सडन प्रयोग में 7.7 Mev ऊर्ज...

एक गाइगर-मार्सडन प्रयोग में 7.7 Mev ऊर्जा वाला `alpha`-कण सीधे संघट्ट की स्थिति में पीछे की ओर प्रतिक्षिप्त होता है। इस घटना से हम अनुमान लगा सकते हैं कि

A

स्वर्ण नाभिक की त्रिज्या `3.0 xx 10^(-14)` मी है

B

स्वर्ण नाभिक की त्रिज्या `3.0 xx 10^(-14)` भी से अधिक है

C

स्वर्ण नाभिक की त्रिज्या `3 xx 10^(-14)` मी से कम है।

D

दिए गए आँकड़ों से नाभिक की त्रिज्या का अनुमान नहीं लगाया जा सकता है

लिखित उत्तर

Verified by Experts

The correct Answer is:
C

मान लीजिए कि `alpha`-कण के केन्द्र और स्वर्ण नाभिक के केन्द्र के बीच की दूरी में है। जब -कण अपने विराम बिन्दु पर स्थित है, तब ऊर्जा संरक्षण के नियमानुसार, `E_i = E_f` को इस प्रकार व्यक्त किया जा सकता है ।
`K = 1/(4pi epsilon_0) ((2e)(Ze))/(d) = (2 Ze^2)/(4 pi epsilon_0 d)`
अतः समीपतम दूरी d होगी
`d = (2 Ze^2)/(4 pi epsilon_0 K)`
प्राकृतिक स्रोतों के `alpha`-कणों में पाई जाने वाली अधिकतम गतिज ऊर्जा 7.7 Mev अथवा `1.2 xx 10^(-12)` जूल है, क्योंकि
`1/(4 pi epsilon_0) = 9.0 xx 10^9` न्यूटन-`"मी"^2 "कूलॉम"^(-2)`
इसलिए `e = 1.6 xx10^(-19)` कूलॉम, के साथ हमें प्राप्त होगा
`(2) (9.0 xx 10^(-19) "न्यूटन-मी"^2//"कूलॉम"^2)`
`d = ((1.6 xx 10^(-19) "कूलॉम")^2 Z)/(1.2 xx 10^(-12) "जूल")`
`= 3.84 xx 10^(-16) Z`मी
पन्नी के स्वर्ण पदार्थ का परमाणु क्रमांक
` Z = 79`, इसलिए
`d (Au)= 3.0 xx 10^(-14)` मी = 30 फर्मी
(`because`1 फर्मी = `10^(-15)` मी)
अतः स्वर्ण नाभिक की त्रिज्या `= 3.0 xx 10^(-14)`मी से कम है।
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