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निम्नलिखित गद्यांश को पढ़कर पूछे गए प्रश...

निम्नलिखित गद्यांश को पढ़कर पूछे गए प्रश्नों के सर्वाधिक उपयुक्त उत्तर वाले विकल्प का चयन कीजिए
अनन्त रूपों में प्रकृति हमारे सामने आती है-कहीं मधुर, सुसज्जित या सुन्दर रूप में, कहीं रूखे बेडौल या कर्कश रूप में, कहीं भव्य,विशाल या विचित्र रूप में, कही उग्र, कराल या भयंकर रूप में। सच्चे कवि का हृदय उसके इन सब रूपों में लीन होता है, क्योंकि उसके अनुराग का कारण अपना खास सुख भोग नहीं, बल्कि चिर साहचर्य द्वारा प्रतिष्ठित वासना है. जो केवल प्रफल्ल प्रसन प्रसाद के सौरभ संचार, मकरन्द लोलप मधप-गज्जार, कोकिल-कजित निकुंज्ज और शीतल सुख-स्पर्श समीर इत्यादि की चर्चा किया करते हैं, वे विषयी या भोगलिप्सु हैं। इसी प्रकार जो केवल मुक्ताभास हिमबिन्दु मण्डित मरकताभ-शादल-जाल, अत्यन्त विशाल गिरि शिखर से गिरते हुए जलप्रपात के गम्भीर गर्त से उठी हुई सीकर-नीहारिका के बीच विविधवर्ण स्फरण की विशालता, भव्यता और विचित्रता में ही अपने हृदय के लिए कुछ पाते हैं, वे तमाशबीन है-सच्चे भावुक या सहदय नहीं।
प्रकृति को 'चिर-सहचरी' की संज्ञा क्यों दी गई है?

A

प्रकृति के नाना उपादानों से प्रेम भावना के कारण

B

जन्म से साथ रहने के कारण

C

प्रकृति-प्रेम के कारण

D

सम्पूर्ण जगत से प्रेम-भाव के कारण

Text Solution

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The correct Answer is:
B

प्रकृति को चिर-सहचरी की संज्ञा इसलिए दी गई है, क्योंकि वह जन्म से साथ रहती है। मनुष्य के जन्म से ही वह उसकी साथी होती है।
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