आमने-सामने होने वाले वार्तालाप में प्रत्येक को बोलने और सुनने का अवसर मिलता है। सामने वाले के द्वारा कही हुई बात में प्रयुक्त शब्द, लहजा, लय, वाक्य प्रभावपूर्ण भी हो सकते है, जिन्हे दूसरा आंशिक/पूर्णरूपेण अपनाना चाहेगा। इसी प्रकार एक-दूसरे की बात को सुनने में वे रूचि पैदा कर सकते है। इन दोनों कौशलों का अर्जन परस्पर बातचीत के माध्यम से सहजतापूर्वक किया जा सकता है।