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राजनीतिक बहसों की गरमी में हम जो भी कहें...

राजनीतिक बहसों की गरमी में हम जो भी कहें, अपने राष्ट्रीय अभिमान की अभिव्यक्ति में हम जितना भी जोर से चीखें एवं सक्रिय राष्ट्रीय सेवा के प्रति हम अत्यन्त उदासीन रहते हैं, क्योंकि हमारा देश प्रकाश से हीन है। मानव स्वभाव में निहित कंजूसी के कारण जिन्हें हमने नीचे रख छोड़ा है, उनके प्रति अन्याय से हम बच ही नहीं सकते। समय-समय पर उनके नाम पर हम पैसा इकट्टा करते हैं, लेकिन उनके हिस्से में। शब्द ही नहीं है, पैसा तो अन्ततः हमारी पार्टी के ही लोगों के पास पहुँचता है। संक्षेप में, जिनके पास बुद्धि, शिक्षा, समृद्धि और सम्मान है, हमारे देश के उस अत्यन्त छोटे हिस्से, 5% और आबादी के अन्य 95% के बीच की दूरी समुद्र से भी अधिक चौड़ी है।
'जितना भी जोर से चीखें' वाक्य में क्रिया है

A

द्विकर्मक

B

अकर्मक

C

सकर्मक

D

प्रेरणार्थक

Text Solution

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The correct Answer is:
B

चीखें. एक अकर्मक क्रिया है। अकर्मक क्रिया, वे क्रिया होती हैं, जिनके कार्य का फल कर्ता में ही रहता है।
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