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Class 14
HINDI
"या लकुटी अरू कामरिया पर राज तिहुँ पुर क...

"या लकुटी अरू कामरिया पर राज तिहुँ पुर को तजि डारौं।" किसकी पंक्ति है?

A

निराला

B

नागार्जुन

C

रघुवीर सहाय

D

मुक्तिबोध

Text Solution

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The correct Answer is:
D

तोड़ने ही होंगे मठ और गढ़ सब., गजाननमाधव मुक्तिबोध की पंक्ति है।
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शिक्षार्थी द्वारा किसी विषय पर बोलना या लिखना भाषा के किस पक्ष को उजागर करता है?

दिए गए पद्यांश को ध्यान से पढ़िए और उसके आधार पर पूछे गए प्रश्न का यथोचित उत्तर दीजिए। पद्यांश 7 आँसू से भाग्य पसीजा, हे मित्र, कहाँ इस जग में। नित यहाँ शक्ति के आगे दीपक जलते मग-मग में। कुछ तनिक ध्यान से सोचो, धरती किसकी हो पाई? बोलो युग-युग तक किसने, किसकी विरुदावलि गाई ? मधुमास मधुर रुचिकर है, पर पतझर भी आता है जग रंगमंच का अभिनय, जो आता सो जाता है। सचमुच वह ही जीवित है, जिसमें कुछ बल-विक्रम है पल-पल घुड़दौड़ यहाँ है, बल-पौरुष का संगम है। दुर्बल को सहज मिटाकर चुपचाप समय खा जाता वीरों के ही गीतों को, इतिहास सदा दोहराता। फिर क्या विषाद, भय, चिन्ता जो होगा सब सह लेंगे परिवर्तन की लहरों में जैसे होगा वह लेंगे। "पल-पल घुड़दौड़ यहाँ है" का आशय है

दिए गए पद्यांश को ध्यान से पढ़िए और उसके आधार पर पूछे गए प्रश्न का यथोचित उत्तर दीजिए। पद्यांश 7 आँसू से भाग्य पसीजा, हे मित्र, कहाँ इस जग में। नित यहाँ शक्ति के आगे दीपक जलते मग-मग में। कुछ तनिक ध्यान से सोचो, धरती किसकी हो पाई? बोलो युग-युग तक किसने, किसकी विरुदावलि गाई ? मधुमास मधुर रुचिकर है, पर पतझर भी आता है जग रंगमंच का अभिनय, जो आता सो जाता है। सचमुच वह ही जीवित है, जिसमें कुछ बल-विक्रम है पल-पल घुड़दौड़ यहाँ है, बल-पौरुष का संगम है। दुर्बल को सहज मिटाकर चुपचाप समय खा जाता वीरों के ही गीतों को, इतिहास सदा दोहराता। फिर क्या विषाद, भय, चिन्ता जो होगा सब सह लेंगे परिवर्तन की लहरों में जैसे होगा वह लेंगे। "आँसू से भाग्य पसीजा, हे मित्र, कहाँ इस जग में।" से क्या आशय है?