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Class 14
HINDI
हमारे व्यावहारिक अथवा वास्तविक जीवन में ...

हमारे व्यावहारिक अथवा वास्तविक जीवन में भी सही सिद्धांत काम करता है कि हम समाज अथवा लोगो को जो देते है, वही हमारे पास लौटकर आता है। हम लोगो से प्यार करते है तो लोग भी हमे प्यार करते है, लेकिन यदि हम लोगो से घृणा करते है, तो वे भी हमसे घृणा ही करेंगे इसमें संदेह नहीं। यही हम सबके साथ सहयोग करते है अथवा ईमानदार हो जाते है। इसे आकर्षण का नियम कहा गया है। हम जैसा स्वभाव विकसित कर लेते है, वैसी ही चीजे हमारी ओर आकर्षित होती है। गन्दगी मक्खी को आकर्षित करती है, तो फूल तितली को आकर्षित करते है।
यदि हम स्वयं को फूल जैसा सुन्दर, सुवासित, मसृणा व रंगीन अर्थात सुन्दर गुणों से युक्त बना लेंगे तो स्वाभाविक है कि समाज के सुन्दर गुणी व्यक्ति हमारी ओर आकर्षित होंगे ही।
यदि हम चाहते है कि हमारे सम्पर्क में केवल अच्छे लोग ही आएं, तो हमे स्वयं को उनके अनुरूप बनाना होगा-दुर्गणों में नहीं, सद्गुणों में। अपने व्यवहार को व्यवस्थित व आदतों को अच्छा करना होगा। अपनी वाणी को कोमल व मधुर बनाना होगा। केवल मात्र बाहर से नहीं, मन की गहराइयो में स्वयं को उनके बनाना होगा-दुर्गणों में नहीं, सद्गुणों में। अपने व्यवहार को व्यवस्थित व आदतों को अच्छा करना होगा। अपनी वाणी को कोमल व मधुर बनाना होगा। केवल मात्र बाहर से नहीं, मन की गहराइयो में स्वयं को सुन्दर बनाना होगा। यदि हम बाहरी रूप-स्वरूप से नहीं, वरन मन से सुन्दर बन पाते है, तो विचार और कर्म स्वयं सुन्दर हो जाएंगे। जीवन रूपी सितार ठीक बजने लगेगा। जीवन के प्रति सत्यम, शिवम और सुंदरम का आकर्षण बढ़ने लगेगा।
अनुच्छेद के निम्नलिखित वाक्य को चार भागो में बाँटा गया है, जिसके एक भाग में अशुद्धि है। उस भाग को पहचानिए

A

iv

B

i

C

ii

D

iii

Text Solution

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The correct Answer is:
B

गद्यांश में प्रयुक्त वाक्य

में अशुद्ध भाग (i) केवल मात्र बाहर से नहीं है। इसके स्थान पर .मात्र बाहर से नहीं. होना चाहिए, क्योकि केवल तथा मात्र एक ही अर्थ का बोध कराते है, अतः हमे अपने विचारो को भी सुन्दर बनाना होगा।
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