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BIOLOGY
रन्धों के खुलने एवं बंद होने की क्रियावि...

रन्धों के खुलने एवं बंद होने की क्रियाविधि के परासरण सिद्धांत को समझाइये।

लिखित उत्तर

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पुष्प में निषेचन से लेकर अंकुरण तक जनन की क्रियाविधि निम्न हैं -
(1) परागण- परागकणों का पुंकेसर से स्त्रीकेसर के वर्तिकाग्र तक पहुँचना परागण कहलाता है। परागण क्रिया हवा, पानी या कीटों द्वारा होती है।
(2) निषेचन- नर तथा मादा युग्मक का मिलना निषेचन कहलाता है। परागण के बाद परागण से एक परागनली निकलती है। परागनली में दो नर युग्मक होते हैं। इनमें से एक नर युग्मक परागनली में से होता हुआ बीजाण्ड तक पहुँचता है और अण्ड के साथ मिलकर (संलयित होकर) युग्मनज बनाता है। इस संलयन को निषेचन कहते हैं।
(3) बीज का बनना-निषेचन के बाद फूल की पंखुड़ी, पुंकेसर, वर्तिका तथा वर्तिकाग्र गिर जाते हैं। बाह्य दल सूख जाता है और अण्डाशय लगा रहता है। अण्डाशय शीघ्रता से वृद्धि करता है और इनमें स्थित कोशिकाएँ विभाजित होकर वृद्धि करती है और बीज का बनना आरंभ हो जाता है। बीज में एक भ्रूण होता है, भ्रूण में एक छोटा मूलांकुर, एक छोटा प्ररोह तथा बीजपत्र होते हैं, अण्डाशय की भित्ति बन जाती है परिपक्व अण्डाशय को फल कहते हैं।
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