जल किन दो गैसों से मिलकर बना है इसे जानने के लिए उसका विद्युत् अपघटन किया जाता है।
आवश्यक सामग्री-चौड़े मुँह वाली प्लास्टिक की बोतल, चाकू, दो छिद्र वाला रबर कार्क, स्टैण्ड, सल्फ्यूरिक अम्ल, पानी, कार्बन की दो छड़ें, दो परखनलियाँ, बैटरी (6 वोल्ट), माचिस।
इस प्रयोग को करने के लिए चौड़े मुँह वाली प्लास्टिक की बोतल लेकर उसकी तली काट दो। बोतल के मुंह पर दो छिद्रवाला रबर कार्क लगाकर इन छिद्रों में कार्बन की दो छड़े लगा दें। बोतल को चित्रानुसार व्यवस्थित करें। उल्टी रखी इस बोतल में दो तिहाई जल भरकर कुछ बूंदै सल्फ्यूरिक अम्ल की डालें। अब जल में भरी काँच की दो परखनलियों को कार्बन इलेक्ट्रोडों पर इस प्रकार उल्टा रखें कि उसमें जल पूरा भरा रहें। दोनों इलेक्ट्रोडों को विद्युत्धारा के स्रोत बैटरी से जोड़ दें। कुछ देर बाद गैस के बुलबुले इलेक्ट्रोड से उठकर परखनलियों में एकत्रित होने लगते हैं। अब दोनों परखनलियों में गैस के आयतन का परीक्षण करें। एक परखनली में दूसरी परखनली की अपेक्षा दुगुनी गैस एकत्रित होती है। जब परखनली में गैस पूरी भर जाये तब उसके मुंह पर अगूंठा लगाकर परखनली को इलेक्ट्रोड से हटा लें । परखनली के मुँह को कार्क द्वारा बंद कर दें। एकत्रित गैस का परीक्षण करने के लिए परखनली का कार्क खोलकर जलती माचिस की तीली ले जाएँ। तीली नीली लौ के साथ जलती है तथा पॉप की आवाज उत्पन्न होती है। यह हाइड्रोजन गैस की उपस्थिति को दर्शाता है। जब दूसरी परखनली गैस से भर जाए तो पूर्वानुसार उसे भी हटा लें। इस परखनली के मुँह के समीप भी जलती हुई माचिस की तीली ले जाएँ। वह तेजी से जलने लगती है। ऐसा ऑक्सीजन गैस के कारण होता है।
इस क्रियाकलाप से यह पता चलता है कि जल हाइड्रोजन तथा ऑक्सीजन के संयोग से बनता है। इसमें आयतन के अनुसार हाइड्रोजन, ऑक्सीजन से दुगनी होती है।