निम्नलिखित व्यवहारों में से कौन-सा जीन पियाजे के द्वारा प्रस्तावित 'मूर्त संक्रियात्मक अवस्था' को विशेषित करता
A
परिकल्पित-निगमनात्मक तर्क , साध्यात्मक विचार
B
संरक्षण, कक्षा समावेशन
C
आस्थगित अनुकरण, पदार्थ स्थायित्व
D
प्रतीकात्मक खेल, विचारों की अनुत्क्रमणीयता
लिखित उत्तर
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The correct Answer is:
B
जीन पियाजे के सिद्धान्त के अनुसार .मूर्त संक्रियात्मक अवस्था., ज्ञानात्मक विकास की तीसरी अवस्था होती है, जो सात वर्ष से प्रारम्भ होकर 12 वर्ष तक चलती है। इस अवस्था में बच्चों के विचारों में संक्रियात्मक क्षमता आ जाती है और अन्तर्दर्शी तर्कशक्ति की जगह तार्किकता आ जाती है। पियाजे के अनुसार, इस अवस्था में बालक तीन महत्त्वपूर्ण सम्प्रत्यय विकसित कर लेता है। 1. संरक्षण बालक, तरल, लम्बाई, भार इत्यादि के संरक्षण से सम्बन्धित समस्याओं का समाधान करते हुए देखे जा सकते हैं। 2. सम्बन्ध बालक इसमें क्रमिक, समस्याओं का समाधान करते हुए देखे. गए हैं। कक्षा समावेशन इसी तरह की गुणवत्ता में विकसित होता है। 3. वर्गीकरण बालक में वस्तुओं के गुण के अनुसार वर्गों या उपवर्गों में बाँट पाने की क्षमता का विकास हो जाता है।