बच्चों में संवेग वातावरण व्यक्तित्व के भावत्मक तत्व एवं परिस्थतियों के प्रति भावों से निर्मित होता है। जैसे -जैसे बच्चें बड़े होते हैं उनमें संवेगात्मक विकास विकसित होता है , जिससे वे प्रवाहित होते हैं संवेग कई प्रकार के होते हैं जैसे - भय , घृणा , वरुणा दुःख , आश्चर्य , भूख स्वाभिमान , क्रोध , वात्सल्य इस्त्यादी।