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नीचे दिए गए गद्यांश को पढ़कर पूछे गए प्रश...

नीचे दिए गए गद्यांश को पढ़कर पूछे गए प्रश्नों के सबसे उपयुक्त उत्तर वाले विकल्प को चुनिए मानव के मर्मस्थल में परोपकार और त्याग जैसे सद्गुणों की जागृति तभी हो पाती है जब वह अपने तुच्छ भौतिक जीवन को नगण्य समझकर उत्साह उमंग के साथ दूसरों की सेवा शुश्रुषा तथा सत्कार करता है। यह कठोर सत्य है कि हम भौतिक रूप में इस संसार में सीमित अवधि तक ही रहेंगें। हमारी मृत्यु के बाद हमारे निकट संबंधी, मित्र, बंध बांधव जीवन भर हमारे लिए शोकाकुल और प्रेमाकुल भी नहीं रहेंगे। दुख मिश्रित इस निर्बल भावना पर विजय पाने के लिए तब हमारे अंतर्मन में एक विचार उठता है कि क्यों न हम अपने सत्कर्मों और सद्गुणों का प्रकाश फैलाकर सदा-सदा के लिए अमर हो जाएं।
सेवक प्रवृत्‍ति अपनाकर हम ऐसा अवश्य कर सकते है। अपने नि:स्वार्थ व्यक्‍तित्व और परहित कर्मों के बल पर हम हमेशा के लिए मानवीय जीवन हेतु उत्प्रेरणा बन सकते हैं। अनुपम मनुष्य जीवन को सद्गति प्रदान करने के लिए यह विचार नया नहीं है। ऐसे विचार सज्जन मनुष्यों के अंतर्मन में सदा उठते रहते हैं तथा इन्हें अपनाकर वे दुनिया में अमर भी हो गए। इस धरा पर स्थायी रूप में नहीं रहने पर भी ऐसे परहितकारी कालांतर तक पूजे जाते रहेंगें। अमूल्य मनुष्य जीवन की सर्वश्रेष्ठ शिक्षा यही है। यही सीखकर मनुष्य जीवन की सर्वश्रेष्ठ शिक्षा यही हैं यही सीखकर मनुष्य का जीवन आनन्दमय और समृद्धिशाली हो सकता है।
यदि इस प्रकार मानव जीवन उन्नत होता है तो यह सम्पूर्ण संसार स्वर्गिक विस्तार ग्रहण कर लेगा। किसी भी मानव को आध्यात्‍मिकता का जो अंतिम ज्ञात मिलेगा, वह भी यही शिक्षा देगा कि धर्म कर्म उद्देश्य सत्कर्मो और सद्गुणों की ज्योति फैलाना ही है।
कठोर सत्य किसे कहा गया है?

A

भावनाओं पर नियंत्रण न कर पाना

B

निकट संबंधियों का अस्थायी प्रेम

C

भौतिक संसार की तुच्छता

D

भौतिक शरीर की नश्वरता

लिखित उत्तर

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The correct Answer is:
D

गद्यांश में कहा गया है कि यह कठोर सत्य है कि हम भौतिक रूप से इस संसार में सीमित अवधि तक रहेगें। अतः कठोर सत्य भौतिक शरीर की नश्वरता को कहा गया है।
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