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Class 14
HINDI
जीवन के इस मोड़ पर, कुछ भी कहा जाता नहीं...

जीवन के इस मोड़ पर, कुछ भी कहा जाता नहीं।
की ड्योढ़ी पर, शब्दों के पहरे हैं।
हँसने को हँसते हैं, जीने को जीते हैं
साधन-सुभीतों में, ज्यादा ही रीते हैं।
बाहर से हरे-भरे, भीतर घाव मरार गहरे
सबके लिए गूंगे हैं, अपने लिए बहरे है।
'भीतर के घाव' से तात्पर्य है

A

शारीरिक क्षति

B

घर के भीतर की अशांति

C

ह्रदय की पीड़ा

D

अंदुरुनी चोट

लिखित उत्तर

Verified by Experts

The correct Answer is:
C

भीतर के गांव से तात्पर्य हृदय की पीडा है।
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