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गुलजार जी, क्या लिखते समय पाठक आपके चिन्...

गुलजार जी, क्या लिखते समय पाठक आपके चिन्तन में होते हैं? देखिए, जब में लिखता हूँ मेरे जेहन में मैं होता हूँ। मैं तय करता हूँ मुझे क्या करना है। मैं पहले यही तय करता हूँ। बात मुझे अपनी कहनी होती है। पाठक को सामने रखकर लिखने का कोई मतलब नहीं होता है। दूसरी महत्त्वपूर्ण बात मैं महसूस करता हूँ। वह है कम्युनिकेशन, अपनी बात को पाठक तक पहुँचाना ...... आर्ट ऑफ कम्युनिकेशन हाँ मैं अपने लेखन को इस कसौटी पर रखता है। मीडिया से जुड़े होने के कारण कहने के तरीके को लेकर मैं सोचता अवश्य हूँ| विषय मेरे होते हैं, मेरी बात सही है या नहीं। आप अपनी ग्रोथ के साथ एक अहाता बनाते चलते हैं हर फाइन आर्ट लोगों तक पहुँचानी ही चाहिए। संगीत हो, कला हो या लेखन हो वो अपने लक्ष्य तक पहुँचनी चाहिए, कहने का ऐसा तरीका तो होना ही चाहिए।
जेहन का अर्थ है

A

दिल

B

दिमाग

C

ख्याल

D

सपना

लिखित उत्तर

Verified by Experts

The correct Answer is:
B

.जेहन. का शाब्दिक अर्थ-दिमाग होता है। जैसे उसके जेहन में इस समय क्या चल रहा है अर्थात् उसके दिमाग में इस समय क्या चल रहा है।
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