अब न गहरी नींद में तुम सो सकोगे, गीत गाकर मैं जगाने आ रहा हूँ। अतल अस्ताचल तुम्हें जाने न दूंगा, अरुण उदयाचल सजाने आ रहा हूँ। कल्पना में आज तक उड़ते रहे तुम, साधना से सिहरकर मुड़ते रहे तुम। अब तुम्हें आकाश में उड़ने न दूंगा, आज धरती पर बसाने आ रहा हूँ। कविता का उपयुक्त शीर्षक हो सकता है