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समस्याओं का हल ढूँढने की क्षमता पर एक अध...

समस्याओं का हल ढूँढने की क्षमता पर एक अध्ययन किया गयाI इसमें भारत में तीन तरह के बच्चों के बीच तुलना की गई, एक तरफ वे बच्चे, जो दुकानदारी करते हैं स्कूल नहीं जाते, ऐसे बच्चे जो दुकान सँभालते हैं और स्कूल भी जाते हैं और तीसरा समूह उन बच्चों का था, जो स्कूल जाते हैं पर दुकान पर कोई मदद नहीं करतेI उनसे गणना के इबारती सवाल पूछे गएI दोनों ही तरह के सवालों में उन स्कूली बच्चों ने जो दुकानदार नहीं हैं, मौखिक गणना या मनगणित का प्रयोग बहुत कम किया, बनिस्बत उनके, जो दुकानदार थेI स्कूली बच्चों ने ऐसी गलतियाँ भी की, जिनका कारण नहीं समझा जा सकाI इससे यह साबित होता है कि दुकानदारी से जुड़े हुए बच्चे हिसाब लगाने में गलती नहीं कर सकते क्योंकि इसका सीधा असर उनके काम पर पड़ता है, जबकि स्कूलों के बच्चे वही हिसाब लगाने में अक्सर भयंकर गलतियाँ कर देते हैंI
इससे यह स्पष्ट होता है कि जिन बच्चों को रोजमर्रा की जिन्दगी में इस तरह के सवालों से जूझना पड़ता है, वे अपने लिए जरूरी गणितीय क्षमता हासिल कर लेते हैंI
लेकिन साथ ही इस बात पर भी गौर करना महत्त्वपूर्ण है कि इस तरह की दक्षताएँ एक स्तर तक और एक कार्य-क्षेत्र तक सीमित होकर रह जाती हैं। इसलिए वे सामाजिक व सांस्कृतिक परिवेश, जो कि ज्ञान को बनाने व बढ़ाने में मदद करते हैं, वहीं उस ज्ञान को संकुचित और सीमित भी कर सकते हैंI
दुकानदार बच्चे हिसाब लगाने में प्राय: गलती नहीं करते क्योंकि

A

वे जन्म से ही बहुत दक्ष हैं

B

वे कभी भी गलती नहीं करते

C

गलती का असर उनके काम पर पड़ता है

D

इससे उन्हें माता-पिता से डाँट पड़ेगी

लिखित उत्तर

Verified by Experts

The correct Answer is:
C

दुकानदार बच्चे जो स्कूल भी जाते हैं, हिसाब लगाने में इसलिए गलती नहीं करते हैं क्योंकि गलती का असर उनके व्यवसाय या कार्य पर पड़ता है।
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