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Class 14
ENVIRONMENTAL STUDIES
जीवन के इस मोड़ पर, कुछ भी कहा जाता नहीं...

जीवन के इस मोड़ पर, कुछ भी कहा जाता नहीं।
की ड्योढ़ी पर, शब्दों के पहरे हैं।
हँसने को हँसते हैं, जीने को जीते हैं
साधन-सुभीतों में, ज्यादा ही रीते हैं।
बाहर से हरे-भरे, भीतर घाव मरार गहरे
सबके लिए गूंगे हैं, अपने लिए बहरे है।
कविता की पंक्तियों में मुख्यतः बात की गई है

A

कुछ भी न कह पाने की विवशता को

B

घावों के हरे भरे होने की

C

गूगा-बहरा होने की

D

साधन-सुभीतों की

लिखित उत्तर

Verified by Experts

The correct Answer is:
A

दी गई पंक्तियों में मुख्यतया कुछ भी न कह पाने की विवशता की बात कही गई है।
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