सर्वप्रथम वर्ष 1973 में अमेरिकी वैज्ञानिको ने अंटार्कटिका के ऊपर ओजोन छिद्र का पता लगाया था। ओजोन का छिद्र या हॉल होना मानव जीवन के लिए चिंता का विषय है, क्योकि इससे मनुष्य को अनेक बीमारियां हो सकती है, जिसमे प्रमुख रूप से चर्म कैंसर, पेड़-पौधे के क्लोरोफिल पर भी विपरीत प्रभाव पड़ता है। ओजोन अपनी सक्रियता के कारण नाइट्रस ऑक्साइड के साथ क्रिया करके विघटित होती है। इस प्रकार विनाश एवं निर्माण की प्राकृतिक प्रक्रिया से गतिक संतुलन बना रहता है।