अनेक समतलीय बलों के अधीन किसी वस्तु को संतुलन की स्थिति में तब कहा जाता है जब उन कार्यकारी बलों का सदिश योगफल शून्य हो। नेट बल शून्य होने पर वस्तु या तो विरामावस्था में रहती है या एकसमान चाल से सरल रेखा में गतिमान रहती है स्पष्टतः संतुलित बलों की अवधारणा न्यूटन के प्रथम गति नियम से आती है। तीन बलों के संतुलन के लिए लैमी का प्रमेय प्रकथन किसी कण पर कार्यकारी तीन एकसमतलीय बलयदि कण को संतुलत रखे तो प्रत्येक बल अन्य दो बलों के बीच के कोण ज्या के समानुपाती होता है
प्रमाण : मान लिया की किसी कण Q पर कार्यकारी तीन बल P,Q तथा R संतुलन में है जिन्हे परिमाण एवं दिशा क्रमशः सदिश `vec(OA),vec(OB)` तथा`vec(OC)` से निरूपित किया गया है । अब OA तथा OB को आसन भुजाएँ मानकर समांतर चतुर्भुज OADB खींचा जिसके विकर्ण OD से बल P एवं Q का परिणामी बल परिणामी एवं दिशा में व्यक्त होगा।
अब चूँकिP,Q तथा R संतुलन में है अतः प्रत्येक बल अन्य दो बलों के परिणामी बल के बराबर और विपरीत होगा। स्पष्तः चित्र में P एवं Q परिणामी परिमाण `vec(OD)` एवं दिशा में `vec(OC` (अर्थात R ) के बराबर और विपरीत होगा। त्रिभुज के गुण के अनुसार `Delta OAD` में
`(OA)/(sin ADO) = (AD)/(sin AOD) =(DO)/(sin OAD) " "....(i)`
यहाँ `sin AOD = sin DOB = sin (180^(@)-BOC) = sin BOC`.
इसी प्रकार `sin AOD = sin (180^(@) - AOC) = sin AOC`
तथा `sin OAD = sin (180^(@) - AOB) = sin AOB `
अब चूँकि `AD=OB` अतः समीकरण (1) से ,
`(OA)/(sin BOC) =(OB)/(sin AOC) =(DO)/(sin AOB)`
इस प्रकार `P/(sin QOR) =Q/(sin ROP) =R/(sin POQ)` प्रमाणित