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PHYSICS
वाष्पीकरण द्वारा द्रव ठंडा क्यों हो जाता...

वाष्पीकरण द्वारा द्रव ठंडा क्यों हो जाता है ?

लिखित उत्तर

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वाष्पीकरण द्वारा द्रव के ठंडे होने की व्याख्या अणुगति सिद्धांत के आधार पर की जा सकती है। द्रव के अणु, गति की दरम्यान आपस में टकराते रहते है और इस प्रकार अपनी ऊर्जा का आदान-प्रदान करते रहते है। अतः , कुछ अणुओ की गतिज ऊर्जा अधिक हो जाती है और कुछ की कम। जब अधिक गतिज ऊर्जा वाला कोई अणु द्रव की सतह पर पहुँचता है तो वह द्रव के भीतर के अणुओ का आकर्षण होते हुए भी द्रव की सतह को छोड़कर बाहर चला जाता है। इसी को .वाष्पीकरण. कहते है। चूँकि वाष्पीकरण में अधिक गतिज ऊर्जा वाले अणु द्रव से बाहर चले जाते है , इसलिए द्रव में शेष अणुओ की औसत गतिज ऊर्जा घट जाती है। चूँकि किसी पदार्थ की ऊष्मा उसके अणुओ की गतिज ऊर्जा ही है , अतः द्रव का ताप कम हो जाता है और इस प्रकार वह ठंडा हो जाता है।
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