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PHYSICS
टेबुल के एक छोर पर रखी कलाई-घड़ी को टिक-...

टेबुल के एक छोर पर रखी कलाई-घड़ी को टिक-टिक आवाज दूसरे छोर पर लगाए गए कान को क्यों सुनाई पड़ती है?

लिखित उत्तर

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ध्वनि के संचरण के लिए प्रत्यास्थ माध्यम की आवश्यकता होती हैं। यदि माध्यम की प्रत्यास्थता अधिक हो, तो ध्वनि अधिक आसानी से संचरित होती है। ठोसों की प्रत्यास्थता गैसों (गैसीय माध्यम) से अधिक होती है। ठोस माध्यम में अनुदैर्घ्य एवं अनुप्रस्थ तरंगें, दोनों ही संचरित होती हैं, जबकि गैसीय माध्यम में केवल अनुदैर्घ्य तरंगें ही संचरित होती हैं। जब टेबुल के एक छोर पर एक कलाई-घड़ी रखी जाती है तब उसके टिक-टिक की धीमी ध्वनि तो टेबुल की लकड़ी (ठोस माध्यम) में आसानी से संचरित होगी, परंतु हवा (गैसीय माध्यम) में नहीं, क्योंकि लकड़ी, हवा की अपेक्षा अधिक प्रत्यास्थ है। यही कारण है कि टेबुल के एक छोर पर रखी कलाई-घड़ी की ध्वनि हवा से होकर कान तक नहीं पहुँच पाती है, परंतु टेबुल के दूसरे छोर पर कान लगाने से वह स्पष्ट रूप से सुनाई पड़ती है।
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