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PHYSICS
दिन की अपेक्षा रात्रि में मनुष्य की आवाज...

दिन की अपेक्षा रात्रि में मनुष्य की आवाज अधिक दूर तक सुनाई पड़ती है, क्यों?

लिखित उत्तर

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रात्रि में पृथ्वी के बहुत निकट हवा की जो परत होती है वह ऊपर की अन्य परतों की अपेक्षा अधिक ठंडी हो जाती है। अतः, इस परत का घनत्व भी अधिकतम हो जाता है। जैसे-जैसे हम ऊपर की ओर जाते हैं, हवा का घनत्व कम होता जाता है। ऐसे समय में जब पृथ्वी की सतह पर कोई ध्वनि उत्पन्न की जाती है तो उस ध्वनि-स्रोत से चारों ओर चलनेवाली ध्वनि-तरंगों को, जो तिरछी होकर ऊपर हवा में बढ़ती है, शनैः-शनैः विरल माध्यम मिलता जाता है। अतः, यह ध्वनि अभिलंब से दूर हटती जाती है और अंत में आपतन कोण जैसे ही क्रांतिक कोण (critical angle) से बड़ा हो जाता है तो ध्वनि पूर्णतः परावर्तित होकर वापस पृथ्वी की सतह की ओर लौटती है। इस तरह रात में ध्वनि दूर तक सुनाई पड़ती है। परंतु, दिन में गर्मी होने के कारण ध्वनि जब विरल से सघन वायु-परतों से होकर जाने लगती है तो अभिलंब की ओर मुड़ती जाती है और पृथ्वी पर वापस नहीं लौटती है। इसलिए दिन में किसी भी स्थान पर सिर्फ वी ध्वनि सुनाई पड़ती है जो प्रत्यक्ष रूप से गमन करती है।
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