Home
Class 9
MATHS
भूमिका | व्यावहारिक जीवन में निर्देशांक ...

भूमिका | व्यावहारिक जीवन में निर्देशांक ज्यामितीय | निर्देशांक पद्धति | चतुर्थांश | चिन्ह परिपाटी | उदाहरण

Promotional Banner

Similar Questions

Explore conceptually related problems

निर्देशांक ज्यामिति |निर्देशांक पद्धति |अभ्यास कार्य |चिन्ह परिपाटी |सारांश

निर्देशांक ज्यामिति |निर्देशांक पद्धति |चिन्ह परिपाटी |NCERT प्रश्नावली |सारांश

निर्देशांक ज्यामिति |निर्देशांक पद्धति |अभ्यास कार्य |NCERT प्रश्नावली |सारांश

निर्देशांक ज्यामिति |चिन्ह परिपाटी |चतुर्थांश |अभ्यास प्रश्न |बिन्दु का आलेखन |प्रश्न |सारांश

निर्देशांक ज्यामिति-परिचय|दूरी सूत्र|उदाहरण|Summary

निर्देशांक ज्यामिति |चिन्ह परिपाटी |अभ्यास प्रश्न |सारांश|निर्देशांक ज्यामिति |NCERT प्रश्नावली

निर्देशांक ज्यामिति |चिन्ह परिपाटी |अभ्यास प्रश्न |सारांश|निर्देशांक ज्यामिति |NCERT प्रश्नावली

भूमिका |कार्तीय पद्धति|चिन्ह परिपाटी |अभ्यास प्रश्न|अभ्यास प्रश्न|OMR

भूमिका |चिन्ह परिपाटी |अभ्यास प्रश्न |अभ्यास प्रश्न |OMR

निर्देशः गद्यांश को पढ़कर निम्नलिखित प्रश्नों में सबसे उचित विकल्प चुनिए। हमारे व्यावहारिक अथवा वास्तविक जीवन में भी यही सिद्धांत काम करता है कि हम समाज अथवा लोगों को जो देते हैं वही हमारे पास लौटकर आता है। हम लोगों से प्यार करते हैं तो लोग भी हमें प्यार करते हैं। लेकिन यदि हम लोगों से घृणा करते हैं तो वे भी हमसे घृणा ही करेंगे इसमें संदेह नहीं। यदि हम सबके साथ सहयोग करते हैं अथवा ईमानदार बने रहते हैं तो दूसरे भी हमारे प्रति सहयोगात्मक और ईमानदार हो जाते हैं। इसे आकर्षण का नियम कहा गया है। हम जैसा स्वभाव विकसित कर लेते हैं वैसी ही चीजें हमारी ओर आकर्षित होती हैं। गंदगी मक्खी को आकर्षित करती है, तो फूल तितली को आकर्षित करते हैं। यदि हम स्वयं को फूल जैसा सुंदर, सुवासित, मसृण व रंगीन अर्थात् सुंदर गुणों से युक्त बना लेंगे तो स्वाभाविक है कि समाज के सुंदर गुणी व्यक्ति हमारी ओर आकर्षित होंगे ही। यदि हम चाहते हैं कि हमारे संपर्क में केवल अच्छे लोग ही आएँ तो हमें स्वयं को उनके अनुरूप बनाना होगा - दुर्गुणों में नहीं, सदगुणों में। अपने व्यवहार को व्यवस्थित व आदतों को अच्छा करना होगा। अपनी वाणी को कोमल व मधुर बनाना होगा। केवल बाहर से नहीं, मन की गहराईयों में स्वयं को सुंदर बनाना होगा। यदि हम बाहरी रूप-स्वरूप से नहीं, वरन मन से सुंदर बन पाते हैं तो विचार और कर्म स्वयं सुंदर हो जाएंगे। जीवन रूपी सितार ठीक बजने लगेगा। जीवन के प्रति सत्यम्, शिवम् और सुंदरम् का आकर्षण बढ़ने लगेगा। अनुच्छेद के निम्नलिखित वाक्य को चार भागों में बाँटा गया है जिनमें एक भाग में अशुद्धि है। उस भाग को पहचानिए: (i) - "केवल मात्र बाहर से नहीं (ii)-मन की गहराइयों में (iii) स्वयं को सुंदर (iv) बनाना होगा।

Recommended Questions
  1. भूमिका | व्यावहारिक जीवन में निर्देशांक ज्यामितीय | निर्देशांक पद्धति ...

    Text Solution

    |

  2. भूमिका || बहुपद के शून्यकों का ज्यामितीय अर्थ || उदाहरण

    Text Solution

    |

  3. कार्तीय निर्देशांक पद्धति को प्रतिपादित करने वाला गणितज्ञ था-

    Text Solution

    |

  4. त्रिविमीय निर्देशांक पद्धति में समीकरण 3y+4z=0 प्रदर्शित करता है -

    Text Solution

    |

  5. भूमिका | व्यावहारिक जीवन में निर्देशांक ज्यामितीय | निर्देशांक पद्धति ...

    Text Solution

    |

  6. भूमिका |निर्देशांक तल #!#अंतरिक्ष में एक बिंदु के निर्देशांक#!#अष्टांश

    Text Solution

    |

  7. Revision|निर्देशांक ज्यामिति #!#अन्तः विभाजन करने वाले बिन्दु के निर्द...

    Text Solution

    |

  8. निर्देशांक ज्यामिति |निर्देशांक पद्धति |अभ्यास कार्य |चिन्ह परिपाटी |स...

    Text Solution

    |

  9. निर्देशांक ज्यामिति |निर्देशांक पद्धति |चिन्ह परिपाटी |NCERT प्रश्नावल...

    Text Solution

    |