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BIOLOGY
अण्डजनन में होने वाला अर्द्धसूत्री विभाज...

अण्डजनन में होने वाला अर्द्धसूत्री विभाजन, शुक्रजनन से भिन्न होता है। बताइये कैसे और क्यों ?

लिखित उत्तर

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(i) अण्डजनन में होने वाला अर्धसूत्री विभाजन, शुक्रजनन से असमान होता है।
(ii) क्योकि
(a) कोशिका द्रव्य की काफी को सुरक्षित रखने के लिए असमान कोशिकाद्रव्यी विभाजन आवश्यक होता है। केवल थोड़ा सा भाग ही धुर्वीय काय में जाता है। केवल एक क्रियाशील पुत्री कोशिका जिसे अंडाणु कहते है बनती है, लेकिन शुक्रजनन में सभी चारो पूर्वशुक्राणु क्रियाशील होते है।
(b) असमान कोशिका विभाजन द्वारा अंडाणु जो अन्य तीन ध्रुवीय कार्यो की अपेक्षा काफी बड़ा बनता है। क्योकि अंडाणु में अधिक जीवद्रव्य एवं अधिक अंगक होने से इसे जीवित रहने के लिए अधिक अवसर होते है।
(c) सभी आवश्यक जैव रसायनो युक्त एकल अंडाणु बनने से भ्रूण का ठीक प्रकार से विकास होना सुनिश्चित होता है।
(d) नर द्वारा लाखो की संख्या में शुक्राणु उत्पादित किये जाते है, जबकि मादा प्रतिमाह केवल एक अंडाणु उत्पादित करती है, जो निषेचन से ठीक पहले द्वितीय अर्धसूत्री विभाजन की भी प्रतीक्षा करता है।
(e) शुक्राणु अत्यंत छोटे एवं गतिशील होते है जिन्हे नर जनन तंत्र से मादा जनन तंत्र में गति करनी पड़ती है। बड़े अंड में बहुतायत में भोजन संचित होता है जिससे निषेचनोपरांत भ्रूण का ठीक प्रकार से विकास हो।
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