सहायक प्रजनन तकनीकियाँ, बन्ध्य दम्पतियों की किस प्रकार सहायता करती हैं? किन्ही तीन तकनीयों का वर्णन करें।
लिखित उत्तर
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(i) असुरक्षित लैंगिक समागम के लगभग दो वर्ष पश्चात् भी बच्चा पैदा न कर पाने की अयोग्यता को बंध्यता के रूप में परिभाषित किया जा सकता है। (ii) सहायक जनन तकनीकें (ART), बंध्य दम्पत्तियो को संतान पैदा कराने में सहायक होती हैं इसमें वे उपचार शामिल हैं जिसमें महिला के अण्डाणु एवं पुरूष के शुक्राणु दोनों का उपचार किया जाता है। (iii) ART की विभिन्न विधियाँ, जो बन्ध्य दम्पतियों की सहायता करती है, उपलब्ध हैं। ये हैं- IVE, ZIFT, GIFT, ICSI एवं AI. (iv) इन विट्रो निषेचन (a) ET द्वारा सम्पन्न IVF को सामान्यतया .परखनली शिशु कार्यक्रम. कहते हैं। IVF का क्रियान्वयन शरीर से बाहर, प्रायः शरीर के अन्दर की परिस्थियों के समान दशाओं में किया जाता है। नर से शुक्राणु तथा मादा से अण्डाण लेकर प्रयोगशाला में शरीर के बाहर जाइगोट तैयार किया जाता है। (b) इस प्रकार तैयार किया जाइगोट को किसी सामान्य मादा के गर्भाशय मे स्थानान्तरित किया जाता है। इस विधि से पैदा बच्चों को परखनली शिशु कहते हैं। (iv) युग्मक-अन्तः फैलोपियन स्थानान्तरण (GIFT) : इस विधि में किसी स्त्री से अण्डाणु लेकर शुक्राणु में मिलाया जाता है तथा तुरन्त ग्राही महिला जो कि अण्डाणु उत्पन्न करने में असक्ष्म है, की फैलोपियन नलिका में स्थानान्तरित कर दिया जाता है। (vi) कृत्रिम वीर्यसेचन (a) इस विधि में वीर्य को पति या किसी स्वस्थ दाता से एकत्र किया जाता है और कृत्रिम रूप से स्त्री के गर्भाशय या योनि में प्रवेश कराया जाता है। (b) यह उस स्थिति में किया जाता है जब नर साथी में शुक्राणुओं की संख्या अत्यंत कम होती है और यह वीर्यसेचन में अक्षम होता है।