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CHEMISTRY
100 एम्पियर धारा प्रवाहित करने पर जल को ...

100 एम्पियर धारा प्रवाहित करने पर जल को कितने समय तक (लगभग) विधुत अपघटित किया जाना चाहिए ताकि मुक्त ऑक्सीजन, 27.66 g डाईबोरेन का पूर्णतया दहन कर सके ? (B का परमाणु घर=10.8 u)

A

1.6 घंटे

B

6.4 घंटे

C

0.8 घंटे

D

3.2 घंटे

Text Solution

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The correct Answer is:
D

`B_(2)H_(2)+3O_(2)toB_(2)O_(3)+3H_(2)O`
संतुलित समीकरण के अनुसार
27.66 g `B_(2)H_(6)` अर्थात 1 मोल `B_(2)H_(6)` के लिए `O_(2)` के 3 मोलो की आवश्यकता होती है अब, इस ऑक्सीजन का उत्पादन जल के विधुत-अपघटन द्वारा निम्नानुसार किया जाता है,
`2H_(2)O overset(4F) to 2H_(2)+O_(2)`
चूँकि 1 मोल `O_(2)` का उत्पादन 4 F आवेश द्वारा होता है अत: 3 मोल `O_(2)` का उत्पादन 12 F आवेश के द्वारा होगा
इसलिए, अब `Q=It` का उपयोग करने पर
`12xx96500C=100xxt(S)`
`t=(12xx96500)/(100xx3600)` घंटे
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गद्यांश को पढ़कर निम्नलिखित प्रश्नों में सबसे उचित विकल्प चुनिए। विद्याभ्यासी पुरुष को साथियों का अभाव कभी नहीं रहता। उसकी कोठरी में सदा ऐसे लोगों का वास रहता है, जो अमर हैं। वे उसके प्रति सहानुभूति प्रकट करने और उसे समझाने के लिए सदा प्रस्तुत रहते हैं। कवि, दार्शनिक और विद्वान् जिन्होंने प्रकृति के रहस्यों का उद्घाटन किया है और बड़े-बड़े महात्मा, जिन्होंने आत्मा के गूढ़ रहस्यों की थाह लगा ली है, सदा उसकी बातें सुनने और उसकी शंकाओं का समाधान करने के लिए उद्यत रहते हैं। बिना किसी उद्देश्य के सरसरी तौर पर पुस्तकों के पन्ने उलटते जाना अध्ययन नहीं है। लिखी हुई बातों को विचारपूर्वक पूर्णरूप से हृदय से ग्रहण करने का नाम अध्ययन है। प्रत्येक स्त्री-पुरुष को अपने पढ़ने का उद्देश्य निश्चित कर लेना चाहिए। इसके लिए सबसे मुख्य बात यह है कि पढ़ना नियमपूर्वक हो अर्थात् इसके लिए नित्य का समय उपयुक्त होता है। (अध्ययन - निबंध, रामचंद्र शुक्ल) विद्याभ्यासी पुरुष के पास किसका वास रहता है?

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विद्याभ्यासी पुरुष को साथियों का अभाव कभी नहीं रहता। उसकी कोठरी मैं सदा ऐसे लोगों का वास रहता है, जो अमर हैं। वे उसके प्रति सहानुभूति प्रकट करने और उसे समझाने के लिए सदा प्रस्तुत रहते हैं। कवि, दार्शनिक और विद्वान् जिन्होंने प्रकृति के रहस्यों का उद्घाटन किया है और बड़े-बड़े महात्मा, जिन्होंने आत्मा के गूढ़ रहस्यों की थाह लगा ली है, सदा उसकी बातें सुनने और उसकी । 'शंकाओं का समाधान करने के लिए उद्यत रहते हैं। बिना किसी उद्देश्य के सरसरी तौर पर पुस्तकों के पन्ने उलटते जाना अध्ययन नहीं है। लिखी हुई बातों को विचारपूर्वक पूर्णरूप से हृदय से ग्रहण करने का नाम अध्ययन है। प्रत्येक स्त्री-पुरुष को अपने पढ़ने का उद्देश्य स्थित कर लेना चाहिए। इसके लिए सबसे मुख्य बात यह है कि पढ़ना नियमपूर्वक हो अर्थात् इसके लिए नित्य का समय उपयुक्त होता है। (अध्ययन - निबंध, रामचंद्र शुक्ल) विद्या का अभ्यास करने वाले व्यक्तियों को साथियों की कमी महसूस नहीं होती है क्योंकि

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