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BIOLOGY
एक पुष्प में, यदि गुरुबीजाणु मातृ कोशिका...

एक पुष्प में, यदि गुरुबीजाणु मातृ कोशिका बिना अर्द्धसूत्री विभाजन के गुरुबीजाणु उत्पन्न करती है और यदि एक गुरुबीजाणु एक भ्रूणकोष में विकसित होता है तो इसकी केन्द्रकें होंगी

A

अगुणित

B

द्विगुणित

C

कुछ अगुणित तथा कुछ द्विगुणित

D

विभिन्न गुणिता वाली।

लिखित उत्तर

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कुछ प्रजातियों में, द्विगुणित अण्ड कोशिका बिना अर्द्धसूत्री विभाजन के बन जाती है एवं बिना निषेचन के भ्रूण में विकसित हो जाती है। यह एक अलैंगिक प्रजनन है जो बिना परागणकारी या चरम वातावरणीय दशा में होता है। कुछ जातियों जैसे- सिट्रस में, भ्रूणकोष को घेरने वाली बीजाण्डकायिक कोशिकाएँ विभाजन प्रारंभ कर देती हैं और भ्रूणों में विकसित हो जाती हैं। यह गुरुबीजाणु मातृ कोशिका में बिना अर्द्धसूत्री विभाजन किए होता है तथा समसूत्री विभाजनों द्वारा द्विगुणित भ्रूण विकसित होते हैं। यह वांछित लक्षणों को लम्बे समय तक परिरक्षित रखने में सहायता करता है। अतः स्पष्ट है कि एपोमिक्टिक जातियाँ द्विगुणित कोशिकाएँ उत्पन्न करती हैं। अगुणित कोशिकाएँ लैंगिक प्रजनन के दौरान बनेंगी जब कि अर्द्धसूत्री विभाजन होगा।
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