(i) बायोरिएक्टर बड़े आयतन (100-1,000 एल) के बर्तन होते हैं जिसमें कच्चे माल को जैविक रूप से विशिष्ट उत्पादों में परिवर्तित किया जाता है।
(ii) सबसे अधिक इस्तेमाल किया जाने वाला बायोरिएक्टर विलोडन प्रकार का होता है, जिसे दिए गए आंकड़े में दिखाया गया है।
(a) साधारण विलोडन-हौज़ बायोरिएक्टर।
(b) दंड विलोडन-हौज़ बायोरिएक्टर जिसके द्वारा जीवाणुविहीन हवा के बुलबुलों का प्रवेश।
(iii) विलोडित-हौज़ रिएक्टर में सामान्तया बेलनाकार होते हैं या जिनके आधार घुमावदार होने से रिएक्टर के अन्दर अंतर्वस्तु के मिश्रण में सहायता मिलती है। विलोडक बायोरिएक्टर ऑक्सीजन उपलब्धता व उसके मिश्रण का काम करते हैं। विकल्पतः, हवा के बुलबुले के रूप में । बायोरिएक्टर में भेजी जा सकती है। यदि आप चित्र को ध्यान से देंखे तो आप पायंगे कि बायो रिएक्टर में एक । प्रक्षोभक तंत्र (एजिटेटर सिस्टम), ऑक्सीजन प्रदाय तंत्र, झाग नियंत्रण तंत्र, तापक्रम नियंत्रण तंत्र, पीएच नियंत्रण तंत्र और प्रतिचयन प्रद्वार लगा होता है जिससे संवर्धन की। थोड़ी मात्रा समय-समय पर निकाली जा सकती है। थोड़ी। मात्रा में संवर्धन को आमतौर पर उत्पादों की कम मात्रा के अनुसंधान और उत्पादन के लिए प्रयोगशालाओं में एक फ्लास्क में नियोजित किया जाता है। हालांकि, उत्पादों का बड़े पैमाने पर उत्पादन बायोरिएक्टर में किया जाता है