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Class 14
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घायल बाज़ फिर उड़ना चाहता था । उसने किसी...

घायल बाज़ फिर उड़ना चाहता था । उसने किसी तरह साहस बटोरकर उड़ान भरी और थोड़ी देर पंख फड़फड़ाकर उड़ने के बाद नीचे गिर गया । साँप ने भी ऊँचाई पर बने अपने खोखल से निकलकर अपने को आसमान में छोड़ दिया और नीचे जा गिरा । साँप कहने लगा
“सो उड़ने का यही आनंद है – भर पाया मैं तो ! पक्षी भी कितने मूर्ख हैं । धरती के सुख से अनजान रहकर आकाश की ऊँचाइयों को नापना चाहते थे। किंतु अब मैंने जान लिया कि आकाश में कुछ नहीं रखा । केवल ढेर-सी रोशनी के सिवा वहाँ कुछ भी नहीं, शरीर को सँभालने के लिए कोई स्थान नहीं, कोई सहारा नहीं । फिर वे पक्षी किस बूते पर इतनी डींगें हाँकते हैं, किसलिए धरती के प्राणियों को इतना छोटा समझते हैं । अब मैं कभी धोखा नहीं खाऊँगा, मैंने आकाश देख लिया और खूब देख लिया । बाज़ तो बड़ी-बड़ी बातें बनाता था, आकाश के गुण गाते थकता नहीं था । उसी की बातों में आकर मैं आकाश में कूदा था । ईश्वर भला करे, मरते मरते बच गया । अब तो मेरी यह बात और भी पक्की हो गई है कि अपनी खोखल से बड़ा सुख और कहीं नहीं है । धरती पर रेंग लेता हूँ, मेरे लिए यह बहुत कुछ है । मुझे आकाश की स्वच्छंदता से क्या लेना-देना ? न वहाँ छत है, न दीवारें हैं, न रेंगने के लिए ज़मीन है । मेरा तो सिर चकराने लगता है। दिल काँप-काँप जाता है । अपने प्राणों को खतरे में डालना कहाँ की चतुराई है ?"
साँप सोचने लगा कि बाज़ अभागा था जिसने आकाश की आज़ादी को प्राप्त करने में अपने प्राणों की बाज़ी लगा दी।
किंतु कुछ देर बाद साँप के आश्चर्य का ठिकाना नहीं रहा । उसने सुना, चट्टानों के नीचे से एक मधुर, रहस्यमय गीत की आवाज़ उठ रही है । पहले उसे अपने कानों पर विश्वास नहीं हुआ । किंतु कुछ देर बाद गीत के स्वर अधिक साफ़ सुनाई देने लगे । वह अपनी गुफा से बाहर आया और चट्टान से नीचे झाँकने लगा । सुरज की सुनहरी किरणों में समुद्र का नीला जल झिलमिला रहा था। लोग मिलकर गा रहे थे -
“ओ निडर बाज़! शत्रुओं से लड़ते हुए तुमने अपना कीमती रक्त बहाया है । पर वह समय दूर नहीं है, जब तुम्हारे खून की एक-एक बूंद जिंदगी के अँधेरे में प्रकाश फैलाएगी और साहसी, बहादुर दिलों में स्वतंत्रता और प्रकाश के लिए प्रेम पैदा करेगी।
तुमने अपना जीवन बलिदान कर दिया किंतु फिर भी तुम अमर हो । जब कभी साहस और वीरता के गीत गाए जाएंगे, तुम्हारा नाम बड़े गर्व और श्रद्धा से लिया जाएगा।"
आकाश के बारे में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए और वे कथन चुनिए जिन्हें साँप असत्य मानता है:
(i) वहाँ ढेर सारी रोशनी है।
(ii) वहाँ कोई आधार नहीं है।
(iii) वहाँ सुख ही सुख है।

A

केवल (i)

B

(i) और (ii)

C

(ii) और (iii)

D

केवल (iii)

लिखित उत्तर

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