भँवर-धाराएँ(EDDY CURRENTS) #!#भँवर-धाराओं का प्रदर्शन-#!#भँवर-धाराओं से हानि और उन्हें कम करने के उपाय
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इस युग के युवक के चित्त को जिस नई विद्या ने सबसे अधिक प्रभावित किया है, वह है मनोविश्लेषणा मनोविज्ञान और मनोविश्लेषण शास्त्र निःसन्देह पठनीय शास्त्र हैं। इन्होंने हमारे मन के भीतर चलती रहने वाली अलक्ष्य धाराओं का ज्ञान कराया है, परन्तु यह बात ध्यान में रखनी चाहिए कि 'साँच मिले तो साँच है, न मिले तो झूठ' वाली बात सार्वदेशिक होती है। मनोविश्लेषण शास्त्र मनुष्यों की उद्भासित विचार निधियों का एक अकिंचन अंश मात्र है। जीवन शास्त्र और पदार्थ विज्ञान के क्षेत्र में हमें जो नवीन तथ्य मालूम हुए हैं, उसके साथ इस शास्त्र के अनुसन्धानों का सामंजस्य स्थापित नहीं किया जा सकता। फिर भी इतना तो निश्चित है कि मानव विश्लेषण के आचार्यों के प्रचारित तत्ववाद में से कुछ विचार इन दिनों वायुमण्डल में व्याप्त है। नवीन साहित्यकार उन्हें अनायास पा जाता है, परन्तु इन विचारों को संयमित और नियन्त्रित करने वाले प्रतिकूलगामी शास्त्रीय परिणाम उसे इतनी आसानी से नहीं मिलते। इसका परिणाम यह हुआ है कि हमारा नवीन साहित्यकार इन विचारों के मायाजाल को आसानी से काट नहीं पाता। वह कुछ इस प्रकार, सोचता है कि अब चेतन चित्त को शक्तिशाली सत्ता हमारे चेतन चित्त के विचारों और कार्यों को रूप दे रही है। हम जो कुछ सोच समझ रहे हैं, वस्तुत: वैसे ही सोचने और समझने का हेतु हमारे अंजाम में हमारे ही अवचेतन चित्त में वर्तमान है और यह तो हम सोच रहे है, समझ रहे है और सोच-समझकर कर रहे हैं। इन बातों का अभिमान करने वाला हमारा चेतन चित्त कितना नगण्य है, अदृश्य में वर्तमान हमारी अवदमित वासनाओं को प्रसुप्त कामनाओं के महासमुद्र में यह दृश्य चेतन चित्त बोतल के कॉर्क के समान उतर रहा है, अदृश्य महासमुद्र की प्रत्येक तरंग इसे अभिभूत कर जाती है मन के भीतर चलती रहने वाली अलक्ष्य धाराओं का ज्ञान कराया है
इस युग के युवक के चित्त को जिस नई विद्या ने सबसे अधिक प्रभावित किया है, वह है मनोविश्लेषणा मनोविज्ञान और मनोविश्लेषण शास्त्र निःसन्देह पठनीय शास्त्र हैं। इन्होंने हमारे मन के भीतर चलती रहने वाली अलक्ष्य धाराओं का ज्ञान कराया है, परन्तु यह बात ध्यान में रखनी चाहिए कि 'साँच मिले तो साँच है, न मिले तो झूठ' वाली बात सार्वदेशिक होती है। मनोविश्लेषण शास्त्र मनुष्यों की उद्भासित विचार निधियों का एक अकिंचन अंश मात्र है। जीवन शास्त्र और पदार्थ विज्ञान के क्षेत्र में हमें जो नवीन तथ्य मालूम हुए हैं, उसके साथ इस शास्त्र के अनुसन्धानों का सामंजस्य स्थापित नहीं किया जा सकता। फिर भी इतना तो निश्चित है कि मानव विश्लेषण के आचार्यों के प्रचारित तत्ववाद में से कुछ विचार इन दिनों वायुमण्डल में व्याप्त है। नवीन साहित्यकार उन्हें अनायास पा जाता है, परन्तु इन विचारों को संयमित और नियन्त्रित करने वाले प्रतिकूलगामी शास्त्रीय परिणाम उसे इतनी आसानी से नहीं मिलते। इसका परिणाम यह हुआ है कि हमारा नवीन साहित्यकार इन विचारों के मायाजाल को आसानी से काट नहीं पाता। वह कुछ इस प्रकार, सोचता है कि अब चेतन चित्त को शक्तिशाली सत्ता हमारे चेतन चित्त के विचारों और कार्यों को रूप दे रही है। हम जो कुछ सोच समझ रहे हैं, वस्तुत: वैसे ही सोचने और समझने का हेतु हमारे अंजाम में हमारे ही अवचेतन चित्त में वर्तमान है और यह तो हम सोच रहे है, समझ रहे है और सोच-समझकर कर रहे हैं। इन बातों का अभिमान करने वाला हमारा चेतन चित्त कितना नगण्य है, अदृश्य में वर्तमान हमारी अवदमित वासनाओं को प्रसुप्त कामनाओं के महासमुद्र में यह दृश्य चेतन चित्त बोतल के कॉर्क के समान उतर रहा है, अदृश्य महासमुद्र की प्रत्येक तरंग इसे अभिभूत कर जाती है हमारे चेतन चित्त के विचारों और कार्यों को
इस युग के युवक के चित्त को जिस नई विद्या ने सबसे अधिक प्रभावित किया है, वह है मनोविश्लेषणा मनोविज्ञान और मनोविश्लेषण शास्त्र निःसन्देह पठनीय शास्त्र हैं। इन्होंने हमारे मन के भीतर चलती रहने वाली अलक्ष्य धाराओं का ज्ञान कराया है, परन्तु यह बात ध्यान में रखनी चाहिए कि 'साँच मिले तो साँच है, न मिले तो झूठ' वाली बात सार्वदेशिक होती है। मनोविश्लेषण शास्त्र मनुष्यों की उद्भासित विचार निधियों का एक अकिंचन अंश मात्र है। जीवन शास्त्र और पदार्थ विज्ञान के क्षेत्र में हमें जो नवीन तथ्य मालूम हुए हैं, उसके साथ इस शास्त्र के अनुसन्धानों का सामंजस्य स्थापित नहीं किया जा सकता। फिर भी इतना तो निश्चित है कि मानव विश्लेषण के आचार्यों के प्रचारित तत्ववाद में से कुछ विचार इन दिनों वायुमण्डल में व्याप्त है। नवीन साहित्यकार उन्हें अनायास पा जाता है, परन्तु इन विचारों को संयमित और नियन्त्रित करने वाले प्रतिकूलगामी शास्त्रीय परिणाम उसे इतनी आसानी से नहीं मिलते। इसका परिणाम यह हुआ है कि हमारा नवीन साहित्यकार इन विचारों के मायाजाल को आसानी से काट नहीं पाता। वह कुछ इस प्रकार, सोचता है कि अब चेतन चित्त को शक्तिशाली सत्ता हमारे चेतन चित्त के विचारों और कार्यों को रूप दे रही है। हम जो कुछ सोच समझ रहे हैं, वस्तुत: वैसे ही सोचने और समझने का हेतु हमारे अंजाम में हमारे ही अवचेतन चित्त में वर्तमान है और यह तो हम सोच रहे है, समझ रहे है और सोच-समझकर कर रहे हैं। इन बातों का अभिमान करने वाला हमारा चेतन चित्त कितना नगण्य है, अदृश्य में वर्तमान हमारी अवदमित वासनाओं को प्रसुप्त कामनाओं के महासमुद्र में यह दृश्य चेतन चित्त बोतल के कॉर्क के समान उतर रहा है, अदृश्य महासमुद्र की प्रत्येक तरंग इसे अभिभूत कर जाती है जीवन शास्त्र और पदार्थ विज्ञान नवीन तथ्यों के साथ किसका सामंजस्य स्थापित नहीं किया जा सकता?
इस युग के युवक के चित्त को जिस नई विद्या ने सबसे अधिक प्रभावित किया है, वह है मनोविश्लेषणा मनोविज्ञान और मनोविश्लेषण शास्त्र निःसन्देह पठनीय शास्त्र हैं। इन्होंने हमारे मन के भीतर चलती रहने वाली अलक्ष्य धाराओं का ज्ञान कराया है, परन्तु यह बात ध्यान में रखनी चाहिए कि 'साँच मिले तो साँच है, न मिले तो झूठ' वाली बात सार्वदेशिक होती है। मनोविश्लेषण शास्त्र मनुष्यों की उद्भासित विचार निधियों का एक अकिंचन अंश मात्र है। जीवन शास्त्र और पदार्थ विज्ञान के क्षेत्र में हमें जो नवीन तथ्य मालूम हुए हैं, उसके साथ इस शास्त्र के अनुसन्धानों का सामंजस्य स्थापित नहीं किया जा सकता। फिर भी इतना तो निश्चित है कि मानव विश्लेषण के आचार्यों के प्रचारित तत्ववाद में से कुछ विचार इन दिनों वायुमण्डल में व्याप्त है। नवीन साहित्यकार उन्हें अनायास पा जाता है, परन्तु इन विचारों को संयमित और नियन्त्रित करने वाले प्रतिकूलगामी शास्त्रीय परिणाम उसे इतनी आसानी से नहीं मिलते। इसका परिणाम यह हुआ है कि हमारा नवीन साहित्यकार इन विचारों के मायाजाल को आसानी से काट नहीं पाता। वह कुछ इस प्रकार, सोचता है कि अब चेतन चित्त को शक्तिशाली सत्ता हमारे चेतन चित्त के विचारों और कार्यों को रूप दे रही है। हम जो कुछ सोच समझ रहे हैं, वस्तुत: वैसे ही सोचने और समझने का हेतु हमारे अंजाम में हमारे ही अवचेतन चित्त में वर्तमान है और यह तो हम सोच रहे है, समझ रहे है और सोच-समझकर कर रहे हैं। इन बातों का अभिमान करने वाला हमारा चेतन चित्त कितना नगण्य है, अदृश्य में वर्तमान हमारी अवदमित वासनाओं को प्रसुप्त कामनाओं के महासमुद्र में यह दृश्य चेतन चित्त बोतल के कॉर्क के समान उतर रहा है, अदृश्य महासमुद्र की प्रत्येक तरंग इसे अभिभूत कर जाती है मनोविज्ञान का सन्धि विच्छेद है
सम्भव है, जो एक निर्बल अधीन राष्ट्र पर शासन करते हैं, उनमें न चाहते हुए भी गलत काम करने की प्रवृत्ति पाई जाती है। उसी तरह ऐसे अध्यापक होते हैं जो बच्चों के ऊपर अपने प्रभुत्व का शिकार हो जाते हैं। जो शासन के अयोग्य होते हैं, उन्हें न केवल कमजोर लोगों पर अन्याय करते हुए कोई अपराध-बोध नहीं होता, बल्कि ऐसा करने में उन्हें एक खास तरह का मजा मिलता है। बच्चे अपनी माँ की गोद में कमजोर, असहाय और अज्ञानी होते हैं। माता के हृदय में स्थित प्रचुर प्यार ही उनकी रक्षा की एकमात्र गारण्टी होता है। इसके बावजूद हमारे घरों में इस बात के उदाहरण कम नहीं कि कैसे हमारे स्वाभाविक प्यार पर धीरज का अभाव और उद्धत प्राधिकार विजय प्राप्त कर लेते हैं और बच्चों को अनुचित कारणों से दण्डित होना पड़ता है। किस तरह के लोग कमजोर लोगों पर अन्याय करते हैं?
गद्यांश को पढ़कर निम्नलिखित प्रश्नों में सबसे उचित विकल्प चुनिए। जिनमें सहिष्णुता की भावना होती है, केवल ऐसे लोग अध्यापक होने योग्य होते हैं। जिनका बच्चों से प्यार भरा लगाव होता है, उनमें धैर्य स्वभावतः आ जाता है। अध्यापकों को जिस अंतर्निहित गंभीर समस्या से जूझना पड़ता है, वह यह है कि उन्हें जिनको देखना है वे शक्ति और प्रभुता में उनकी बराबरी के नहीं होते। अध्यापक के लिए एकदम तुच्छ या बिना किसी कारण के या फिर वास्तविकता के बजाए किसी काल्पनिक कारण के चलते अपने छात्रों के सामने धैर्य खो देना, उनकी खिल्ली उड़ाना, उन्हें अपमानित या दंडित करना एकदम आसान और संभव है। जो एक निर्बल अधीन राष्ट्र पर शासन करते हैं, उनमें न चाहते हुए भी गलत काम करने की प्रवृत्ति पाई जाती है। उसी तरह ऐसे अध्यापक होते हैं जो बच्चों के ऊपर अपने प्रभुत्व का शिकार हो जाते हैं। जो शासन के अयोग्य होते हैं, उन्हें न केवल कमजोर लोगों पर अन्याय करते हुए कोई अपराध-बोध नहीं होता, बल्कि ऐसा करने में उन्हें एक खास तरह का मजा मिलता है। बच्चे अपनी माँ की गोद में कमजोर, असहाय और अज्ञानी होते हैं। माता के हृदय में स्थित प्रचुर प्यार ही उनकी रक्षा की एकमात्र गारंटी होता है। इसके बावजूद हमारे घरों में इस बात के उदाहरण कम नहीं है कि कैसे हमारे स्वाभाविक प्यार पर धीरज का अभाव और उद्धत प्राधिकार विजय प्राप्त कर लेते हैं और बच्चों को अनुचित कारणों से दंडित होना पड़ता है। कौन-सा शब्द-समूह शेष शब्द-समूहों से भिन्न है?
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