Home
Class 14
HINDI
पुरुषार्थ दार्शनिक विषय है, पर दर्शन का ...

पुरुषार्थ दार्शनिक विषय है, पर दर्शन का जीवन से घनिष्ठ सम्बन्ध है। वह थोड़े-से विद्यार्थियों का पाठ्य विषय मात्र नहीं है। प्रत्येक समाज को एक दार्शनिक मत स्वीकार करना होता है। उसी के आधार पर उसकी राजनीतिक, सामाजिक और कौटुम्बिक व्यवस्था का व्यूह खड़ा होता है। जो समाज अपने वैयक्तिक और सामूहिक जीवन को केवल प्रतीयमान उपयोगिता के आधार पर चलाना चाहेगा उसको बड़ी कठिनाइयों का सामना करना पड़ेगा। एक विभाग के आदर्श दूसरे विभाग के आदर्श से टकराएँगे। जो बात एक क्षेत्र में ठीक जॅचेगी वही दूसरे क्षेत्र में अनुचित कहलाएगी और मनुष्य के लिए अपना कर्तव्य स्थिर करना कठिन हो जाएगा। इसका परिणाम आज दिख रहा है। चोरी करना बुरा है, पर पराए देश का शोषण करना बुरा नहीं है। झूठ बोलना बुरा है, पर राजनीतिक क्षेत्र में सच बोलने पर अड़े रहना मूर्खता है। घर वालों के साथ, देशवासियों के साथ और परदेशियों के साथ बर्ताव करने के लिए अलग-अलग आचारावलियाँ बन गई हैं। इससे विवेकशील मनुष्य को कष्ट होता है।
विवेकशील मनुष्य को कष्ट पहुँचाने वाले विरोधाभास हैं

A

सभी व्यक्तियों पर एक ही दर्शन थोपने का प्रयास

B

परिवार, देश और विदेशी लोगों के लिए पृथक आचार संहिता

C

समाज विशेष के लिए नैतिक मूल्य और नियमों का निर्धारण

D

दर्शन के अनुसार राजनीतिक, सामाजिक तथा पारिवारिक व्यवस्था का निर्धारण

लिखित उत्तर

Verified by Experts

Promotional Banner