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शिक्षा की बैंकीय अवधारणा (बैंकिंग कॉनसेप...

शिक्षा की बैंकीय अवधारणा (बैंकिंग कॉनसेप्ट) में ज्ञान एक उपहार होता है, जो स्वयं को ज्ञानवान समझने वालों के द्वारा उनको दिया जाता है, जिन्हें वे नितान्त अज्ञानी मानते हैं। दूसरों को परम अज्ञानी बताना उत्पीड़न की विचारधारा की विशेषता है। वह शिक्षा और ज्ञान को जिज्ञासा की प्रक्रिया नहीं मानती। शिक्षक अपने छात्रों के समक्ष स्वयं को एक आवश्यक विलोम के रूप में प्रस्तुत करता है, उन्हें परम अज्ञानी मानकर वह अपने अस्तित्व का औचित्य सिद्ध करता है। छात्र हेगेल के द्वन्द्ववाद में वर्णित दासों की भाँति, अलगाव के शिकार होने के कारण अपने अज्ञान को शिक्षक के अस्तित्व का औचित्य सिद्ध करने वाला समझते हैं, लेकिन इस फर्क के साथ कि दास तो अपनी वास्तविकता को जान लेता है कि मालिक का अस्तित्व उसके अस्तित्व पर निर्भर है, लेकिन ये छात्र अपनी इस वास्तविकता को कभी नहीं जान पाते कि वे भी शिक्षक को शिक्षित करते हैं।
शिक्षा की बैंकीय अवधारणा शिक्षा को किस रूप में प्रस्तुत करती है?

A

शिक्षा में उपहारों के लेन-देन होते हैं।

B

शिक्षा की प्रक्रिया में केवल परम अज्ञानी शामिल होते हैं।

C

शिक्षा में केवल छात्र शिक्षकों को करते हैं।

D

शिक्षा ज्ञान के लेन-देन की प्रति

लिखित उत्तर

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